विकास त रजऊ सैतालीस में आई।
खुलल बा गटर, त
बंद करा शटर,
घरे जा के सुत जा, ओढ़ के रजाई।
पीछे त बा गडहा, आगे हौ चढ़ाई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।
इलाजवा क अइसन का बा जल्दी,
मरले के बाद त मिल जाई दवाई।
लौटबा कईसो त मार देई महँगाई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।
बोतल में हौ पानी, हेराय गयल रोटी,
नून, तेल, लकड़ी क हो गयल मनाही।
तनी बतावा, लइका-बच्चा
का खाई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।
ओनकर मौसम रंगीन रही, का करबा,
तोहार जिनगी मलीन रही, का करबा।
चुप रहा, जाके करा अब खेत जुताई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।







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