बिना शिनाख़्त का प्रयास किए
रिपोर्ट में दर्ज कर दिया
गया—
“शिनाख़्त नहीं हो पाई।”
और फिर
पंचनामा कर
आनन-फानन में
उसे दफ़ना दिया गया।
पोस्टमार्टम की
रस्म-अदायगी भी नहीं हुई—
क्योंकि
उसके फटे कपड़ों से
झाँक रहे थे
उसके जिस्म पर
कुछ “सभ्य” दाँतों के निशान।
वे निशान
इतने परिचित थे
कि कागज़ों ने
आँखें मूँद लीं,
और कानून ने खुद
तोड़ दिया कानून का दायरा
चश्मदीदों ने
दबी ज़ुबान में बताया—
तब तक आसमान में
कुछ गिद्ध मंडरा रहे थे,
जब तक
वह ज़िंदा थी।








