मैं अपनी माशूका से
सोमवार को आँखें चार करता हूँ,
फुर्सत से मंगलवार के दिन
प्यार का इज़हार करता हूँ।
बुधवार बीत जाता
घूमने-फिरने और डेटिंग में,
और बृहस्पतिवार निकल जाता है
थोड़ी-सी मनुहार और वेटिंग
में।
शुक्रवार को फिर
शादी और हनीमून का जुनून,
शनिवार आते-आते
छोटी-सी अनबन का सुकून।
रविवार को होता है
थोड़ा-सा ब्रेकअप, थोड़ा मौन,
फिर दिल कहता है—
चलो, रीस्टार्ट करो ये लव-ज़ोन।
और फिर…
मैं अपनी उसी माशूका से
सोमवार को आँखें चार करता
हूँ।
सबसे बड़ी बात—
ये माशूका कोई और नहीं,
मेरी पत्नी ही है!
जिसके साथ
पिछले चार दशकों से
हर हफ्ते
हम अपने वैवाहिक जीवन का
इसी तरह
नवीनीकरण करते आ रहे हैं।







