अरसे
से गुम थी
पर
अंततः
एक तबेले में
अधमरी गाय को
घास डालती मिली—
शिक्षा।
भूसे
के ढेर के नीचे
मृतप्राय—
उसने
अपना आवास
बना लिया था।
वेंटीलेटर
भी
मुहैया नहीं कराया गया,
क्योंकि
आँकड़ों ने उसे
सम्पूर्ण स्वस्थ
घोषित किया हुआ था।
उसका
अस्तित्व
प्रकाश में आते ही
मीडिया के माइक ने
उसे घेर लिया।
सवालों
की
बौछार होने लगी—
“आपको
कैसा लग रहा है?
आप यहाँ हैं,
पर छात्र कहाँ हैं?”
कराहते
हुए
जवाब मिला—
“बच्चे
टूटी सड़क के कारण
नहीं आ पा रहे हैं।”
मीडिया
का माइक
तुरंत
सड़क की ओर मुड़ गया—
पर
सड़क भी
आँकड़ों में
एकदम दुरुस्त थी।
तभी
एक बच्चा
कीचड़ में फिसलकर
सड़क के किनारे जा गिरा।
माइक
उसकी ओर बढ़ा—
पर
बच्चा
आँकड़ों में
स्कूल पहुँच चुका था।
और शिक्षा?
वह अब भी
तबेले में
अधमरी गाय को
घास डाल रही थी।












