शनिवार, 14 मार्च 2026

तालियों से सच बदलता नहीं ---


दर्द के गाँव में ठहर कर देखिये
मौत से पहले ही मर कर देखिये

 

भूख की आँखों में जलते प्रश्न हैं,
उनसे आँखें आप भर कर देखिये

 

तालियों से सच बदलता ही नहीं,
आईनों से भी गुज़र कर देखिये

 

रात कितनी भी सियाही ओढ़ ले,
एक दीया फिर भी धर कर देखिये

 

सिंहासन काँपेगा इक दिन यक़ीनन,
जनता में जाकर उतर कर देखिये

 

वर्मासच बोल दे तो चुभेगा ज़रूर,

कलेजे पे पत्थर को धर कर तो देखिये

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