शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

प्रेम का पाइथागोरस


समकोण त्रिभुज का
लंब बनूँ मैं,
तुम बन जाना आधार।

 

प्रेमाकुल अधरों पर
अधरों का स्पर्श,
क्षण भर में
बन जाए अंगार।

 

जब मिलन-बिंदु पर
हम आरोपित होंगे,
भावों के वर्ग
एकाकार होंगे

तब प्रेम के योग से
सिद्ध यही होगा,
दोनों के विस्तार में
कर्ण-सा विस्तार होगा।

 

तुम और मैं अलग कहाँ,
बस रूप हैं दो आकार
भुजा-भुजा का प्रेम ही
है जीवन का है सार।

 

पाइथागोरस सा शाश्वत सच,

हमारी रूह में समाएगा।

जब तुम और मैं एक होंगे,

जीवन 'कर्ण' बन जाएगा।

1 टिप्पणी:

Poonam Matia ने कहा…

बहुत खूब ......प्रेम का गणित