
हवा के रूख का हवाला मत दो
मुझे अपने मन से निकाला मत दो
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जिस उजास में गुम होने लगे वजूद
ऐसी रोशनी औ ऐसा उजाला मत दो
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जिसे पढ़कर माहौल उदास हो जाए
मेरे हाथ में ऐसा कोई रिसाला मत दो
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नफरती जुनून लेकर निकलते हैं बच्चे
ऐसी तालीम, ऐसी पाठशाला मत दो
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तुम्हारी मुस्कान का तिलिस्म, उफ़ --
फूल से दिखते खार की माला मत दो






