Friday, June 19, 2009

'हया' का मतलब -- ! ! !




सूरज को भी छाँव में आते हुए देखा है


गली को सड़क से बतियाते हुए देखा है




'हया' का मतलब समझ गया हूँ मैं भी


पलक झुककर उन्हें शरमाते हुए देखा है




एक पल में अनगिनत छवि उभर गयी


आइने से आईने को बतियाते हुए देखा है




गठबंधन के बंधन मज़बूत हो गए हैं


गीदडों को शहर में आते हुए देखा है




तपिश बढ़ गयी, आबोहवा बदली सी है


मासूम फूलों को मुरझाते हुए देखा है




अदब का तमगा दिया गया उसको ही


कल तक जिसे ज़ुल्म ढाते हुए देखा है




सपनों की आहटें भी चौकन्ना करती हैं


लोगों को ख्वाब भी चुराते हुए देखा है

15 comments:

Razia said...

लोगों को ख्वाब भी चुराते हुए देखा है
bahut khoob bahut sunder

ओम आर्य said...

तपिश बढ़ गयी, आबोहवा बदली सी हैमासूम फूलों को मुरझाते हुए देखा है

वैसे सभी शेर माला के मोतियो जैसे है पर यह मेरे दिल के करीब लगा बहुत सुन्दर्

vandana said...

bahut hi khoobsoorat alfaz.

ज्योति सिंह said...

एक पल में अनगिनत छवि उभर गयीआइने से आईने को बतियाते हुए देखा है .
bahut khoob .aap mere blog pe aaye shukriya .sabhi rachnaye dekhi ati sundar .

venus kesari said...

मैं आपको नियमित पढता रहा हूँ आपकी हर रचना में मुझे कुछ विशेष नजर आया है मगर आज मुझे कोई शेर ख़ास पसंद नहीं आया कहाँ औसत लगी मुझे.

आशा करता हूँ इस बेबाक टिप्पडी का बुरा नहीं मानेगें
वीनस केसरी

SWAPN said...

bahut khoob verma ji , sabhi sher umda. badhaai.

स्वप्न मंजूषा शैल said...

सपनों की आहटें भी चौकन्ना करती हैं
लोगों को ख्वाब भी चुराते हुए देखा है

bahut khoob likha hai aapne..
badhai..

abhivyakti said...

अदब का तमगा दिया गया उसको ही
कल तक जिसे ज़ुल्म ढाते हुए देखा है

बहुत सुन्दर गजल
बहुत अच्छा लिखा है आपने
इसी तरह अपने बेहतरीन सृजन से पाठकों को आनंदित करतें रहें.
अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा...!

पाखी

शोभना चौरे said...

अदब का तमगा दिया गया उसको हीकल तक जिसे ज़ुल्म ढाते हुए देखा है
सपनों की आहटें भी चौकन्ना करती हैंलोगों को ख्वाब भी चुराते हुए देखा ह
ak arth purn gajal ki.khubsurat abhi vykti.

Navnit Nirav said...

behad prabhavshali pantiya hain ye
तपिश बढ़ गयी, आबोहवा बदली सी हैमासूम फूलों को मुरझाते हुए देखा है
bahut pasand aayi.

रश्मि प्रभा... said...

sapno ki aahten aur khwaabon ki chori....waah

Ravi Srivastava said...

आज मुझे आप का ब्लॉग देखने का सुअवसर मिला।
वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है। वाह!!! भावनाओं का कितना सजीव चित्रण किया है आप ने... और कितनी संजीदगी है इन लाइनों में.. सचमुच मजा आ गया....
आप की रचनाएँ, स्टाइल अन्य सबसे थोड़ा हट के है...

बधाई स्वीकारें।

आप मेरे ब्लॉग पर आए और एक उत्साहवर्द्धक कमेन्ट दिया, शुक्रिया.

आप के अमूल्य सुझावों और टिप्पणियों का 'मेरी पत्रिका' में स्वागत है...

Link : www.meripatrika.co.cc

…Ravi Srivastava

Mahasweta Das said...

i like it

zindagi ki kalam se! said...

bahut umda..achhi rachna!

Siddharth Garg said...

Great post. Check my website on hindi stories at afsaana
. Thanks!