Wednesday, June 10, 2009

इतना सन्नाटा क्यों है भाई?




हर सुंदर फूल के नीचे कांटा क्यों है भाई?


भीड़ बहुत है पर इतना सन्नाटा क्यों है भाई?




मशक्कत की रोटी पर गिद्ध निगाहें क्यों है?


हर गरीब का ही गीला आटा क्यों है भाई?




चीज़ों की कीमत आसमान चढ़ घूर रही है


मंदी-मंदी चिल्लाते हो, घाटा क्यों है भाई?




सीधी राह पकड़कर जाते मंजिल मिल जाती


इतना मुश्किल राह मगर छांटा क्यों है भाई?




कातर निगाह से देख रहा है बच्चा देखो तो


बेवज़ह आपने मासूम को डांटा क्यों है भाई?



14 comments:

Babli said...

मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत ही सुंदर कविता लिखा है आपने! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

श्यामल सुमन said...

मशक्कत की रोटी--------। भाई वाह। आम जिन्दगी की बातें सहजता से कह गए। कभी मैंने भी लिखा था-

खाकर के सूखी रोटी लहू बूँद भर बना।
फिर से लहू जला के रोटी जुटाते हैं।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

M Verma said...

Thank you for inspiring me for my ghazal.
again thank you

Razia said...

बहुत खूब --
क्या बात कही --
ऐसे ही कहते रहिए

Dr. Tripat said...

bhawnaao ko bahut acha pragat kiya hai aapne..

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बहुत खूब....
वर्तमान की सच्चाई को दर्शाती हुई एक अच्छी रचना....आभार

श्याम कोरी 'उदय' said...

... दोनों ही गजलें प्रभावशाली हैं!!!!

निर्झर'नीर said...

aaj ke daur ka sahi chintan kiya hai aapne..
vo bhi kavy mein

शोभना चौरे said...

मशक्कत की रोटी पर गिद्ध निगाहें क्यों है?हर गरीब का ही गीला आटा क्यों है
marmik anubhuti .

aata geela hone par bhi santosh ki chav hai unke pas .

Pyaasa Sajal said...

aapki shayari ka star bahut oonchaa hai....itni samajhdaari,itni pakad...too good :)

अनिल कान्त : said...

bahut achchha likha hai aapne

Vijay Kumar Sappatti said...

namaskar sir,

main bahut der se aapki kavitayen padh raha hoon .. aap bahut accha lihte hai .. man ko chooti hui bhaavnaye shabd chitr ban jaate hai .. ye kavita mujhe bahut acchi lagi ..bhaav itne gahre hai ki man se aah nikali hai sir..

badhai sweekar karen

dhanywad,
vijay

pls read my new poem :

http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html

संजय भास्कर said...

namaskar sir,

main bahut dino se aapki kavitayen padh raha hoon .. aap bahut accha lihte hai ..

Siddharth Garg said...

Great post. Check my website on hindi stories at afsaana
. Thanks!