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जेबों में अपने हर सामान रखते हैं
दिल में ये लोग तो दुकान रखते हैं
शातिर मंसूबों का ज़ायजा क्या लेंगे
दुश्मनों के लिए ये गुणगान रखते हैं
बिखर कर भी जुड़ जाते है पल में
जिस्म में अपने सख्तजान रखते है.
मुआवजें जब शिनाख़्त पर होते हैं
थोड़ा सा जिस्म लहुलुहान रखते हैं
बिखर जायेंगे तुम्हारे हल्फिया बयान
वे बहुत ऊँची जान-पहचान रखते हैं
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