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शनिवार, 13 जून 2026

कतल जेकर भयल ओही बा कातिल (भोजपुरी)

 

नेतवन के कारण चहु ओर त तबाही बा

लुट गयल देश मगर शौक राजशाही बा।

 

ओनके बदे सजेला छप्पन भोग क थरिया*

हमनी खातिर कडुवा तेलवो* क मनाही बा।

 

महलन में बा सतरंगी अँजोरिया क नदिया

झोपडी में ढेबरी जलावे के भी कोताही बा।

 

भूख से बेहाल जनता पूछत बाटे चुपके से,
ई कइसन रामराजकइसन बादशाही बा।

 

ओनकर हर गलती पर परदा पड़ल रहेला,
गरीब गुरबा के संसवो पर भी उगाही बा।

 

धरम के नाम पे बाँट देहला अंग्रेजन जइसे,
फूट के सरहद पर अबो तैनात सिपाही बा।

 

देखा कतल जेकर भयल ओही बा कातिल

एही बात के बदे त अदालत में गवाही बा।



*थरिया = थाली

*कडुवा तेल = सरसो का तेल

शनिवार, 13 अप्रैल 2019

इ शहर में आउर कौनो परेशानी नाही बा (भोजपुरी ग़ज़ल)

खाना नाहीं, बिजली आ पानी नाहीं बा,
ई शहर में अउर कौनो परेशानी नाहीं बा।

नेतवन के देखs, कान कुतर देहले चूहा,
लागे ला कि शहर में अब चूहेदानी नाहीं बा।

देखे में पहलवान जइसन लोग दिख जालन,
सच पूछs त कहब—इहाँ जवानी नाहीं बा।

इज्जत, आबरू आ हत्या रोज के बात ह,
बतावा के कइसे कहीं—ई राजधानी नाहीं बा।

हिस्सा में इनके किस्सा-कहानी कुछुओ नाहीं,
काहेन कि संगे इनका बुढ़िया नानी नाहीं बा।

कौड़ी के भाव इहाँ बिक जाला ईमान रोज,
लागे ला अब कहीं कवनो ईमानदानी नाहीं बा।

बड़-बड़ बिल्डिंग खड़ा, छत फिरो टपकत बा,
कइसे कहीं कि शहर खानदानी नाहीं बा।

जेकरा जिम्मा रहे रखवाली एह चमन के,
ओकरा नजर में अब हया-पानी नाहीं बा।

सब कुछ त बा, बस इंसानियत के कमी बा,
इंसान त बाड़ें, बाकिर अब इंसानी नाहीं बा।

कलम त बहुत बा, बाकिर सच के जोर कम बा,
‘वर्मा’ के ग़ज़ल के इहाँ कदरदानी नाहीं बा।

शुक्रवार, 29 जून 2012

चिठिया लिख के पठावा हो अम्मा .. (भोजपुरी)


चिठिया लिख के पठावा हो अम्मा
गऊंआ क तूं हाल बतावा हो अम्मा
हमरे मन में त बा बहुते सवाल
पहिले त तू बतावा आपन हाल
घुटना क दरद अब कईसन हौ 
अबकी तोहरा बदे ले आईब शाल
मन क बतिया त सुनावा हो अम्मा
गऊंआ क तूं हाल बतावा हो अम्मा
टुबेलवा क पानी आयल की नाही
धनवा क बेहन रोपायल की नाही
झुराय गयल होई अबकी त पोखरी
परोरा* क खेतवा निरायल की नाही
अपने नजरिया से दिखावा हो अम्मा
गऊंआ क तूं हाल बतावा हो अम्मा
छोटकी बछियवा बियायल त होई
पटीदारी में इन्नर* बटायल त होई
चरे जात होई इ त वरूणा* किनारे
मरचा से नज़र उतरायल त होई
मीठ बोल बचन से लुभावा हो अम्मा
गऊंआ क तूं हाल बतावा हो अम्मा
बाबूजी से कह दा जल्दी हम आईब
ओनके हम अबकी दिल्ली ले आईब
खटेलन खेतवा में बरधा के जईसन
अबकी इहाँ हम इंडिया गेट घुमाईब
कटहर क तू अचार बनावा हो अम्मा
गऊंआ क तूं हाल बतावा हो अम्मा
 

परोरा = परवल
इन्नर = गाय के प्रथम दूध को जलाकर बनाया गया पदार्थ
वरूणा = हमारे गाँव से गुजरने वाली नदी
चित्र : साधिकार बिना आभार देवेन्द्र पाण्डेय (बेचैन आत्मा)

रविवार, 25 अप्रैल 2010

कईसे खेतवा से बोझा ढोवाई (भोजपुरी)

हिलत नाहीं पेड़वा क डाल बा

गरमी से त जियरा बेहाल बा

कईसे खेतवा से बोझा ढोवाई

कईसे बतावा अब दऊरी दवाई

सूखाय गयल देखा इ ताल बा

हिलत नाहीं पेड़वा क डाल बा

गरमी से त जियरा बेहाल बा

.

झर गयल अमवा क टिकोरवा

कटहर चोराय लेहलेस चोरवा

कैसों रोटी क जुगाड़ हो गयल

त रीष गयल रहरी क दाल बा

हिलत नाहीं पेड़वा का डाल बा

गरमी से त जियरा बेहाल बा

.

उधार जिनगी क भार हो गयल

लहुरा लड़कवा बेमार हो गयल

मड़ई क छानी छवाई अब कईसे

बरधा के भी जड़ावे के नाल बा

हिलत नाहीं पेड़वा का डाल बा

गरमी से त जियरा बेहाल बा

बुधवार, 7 अप्रैल 2010

छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ (भोजपुरी)

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ

घर में दरार बा बाकी सब ठीक हौ

अबकी छुट्टी मिली त आइब जरूर

हम देत बाई तोहके जबान अम्मा

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

.

भोरहरी में उठे क आदत तूँ छोड़ा

मीठ बोल-बतिया से सबके तूँ जोड़ा

कब ले बितईबू तूँ दिन मड़ई में

लउटब त बनवाईब मकान अम्मा

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

.

गिरल बरधा भी उठ जाई हो अम्मा

भर-भर नाद सानी खाई हो अम्मा

सींग आ गयल होई अब त बछवा के

करवाई दीह ओकार नथान अम्मा

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

आज उम्र के इस पड़ाव पर माँ के आंचल मे सिर रखने की इच्छा हुई. मेरे लिये भोजपुरी माँ के आंचल से कम नहीं है.