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मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

अरावली: एक असहज सवाल

 

अब तक सोये बुलडोज़रों को
आख़िर काम मिलेगा,
अरावलीतुझे अब
एक नया नाम मिलेगा।

जिसे पहाड़ कहा जाता था
वह प्लॉट कहलायेगा,
हर चोटी का कद अब
फ़ाइल में नापा जायेगा।

तू अपनी ऊँचाई खुद
कभी क्यों नहीं नापता?
तू सियासतों की फितरत
अब तक क्यों नहीं भापता?

कुर्सी से दिखता जो ऊँचा
वही तुझे महान लगे,
धरती की चीखें तुझे
अब तक क्यों अनजान लगे?

यह विकास नहीं
यह माप बदलने की साज़िश है,
जहाँ बुलडोज़र सच है
और पहाड़ एक बार-बार उठता
असहज सवाल है।


याद रख!
इतिहास ऊँचाई नहीं पूछेगा,
इतिहास नीयत नापेगा।

सोमवार, 10 अगस्त 2009

बिस्तर क्यूँ इतना सलवटी होता है ~~

*

मौसम जब कभी पंचवटी होता है
बिस्तर भी बहुत तब सलवटी होता है

जहाँ डूब के दम तोड़ती हैं फितरतें
वो जज़्बातों की ही तलहटी होता है

जब-जब तुम्हें पास अपने पाता हूँ
बावरा मन बेवजह ही नटी होता है

क्या दूँ तुम्हें दिल के सिवा अब बोलो
हर इक रिश्ता यहाँ तो बनावटी होता है

सजने को आतुर हो उठता है मन
रूबरू जब पैकर तेरा लटी होता है