तुम्हारे दमन ने
मृत्युदंड के आदेश पर
हस्ताक्षर करके
निब तोड़ने की
परम्परा का
निर्वहन किया।
पर
प्रतिरोध के बीज
इतने सूक्ष्म थे
कि
फाँसी के फंदों को भी
नकार गए।
तुमने
उन्हें
नगण्य समझकर
नज़रअंदाज़ कर दिया।
और...
यही
तुम्हारी भूल थी।
तुम्हें
क्या पता—
बीजों का स्वभाव ही है
अँधेरे में
जड़ें जमाना।
एक
दिन
तुम्हारी बनाई
दीवारों की दरारों से
वे निकलेंगे—
और
तुम्हारे दमन की छाती पर
उसी टूटे हुए निब से
प्रतिरोध का
एक पूरा जंगल
लिख देंगे।

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