गुरुवार, 8 जनवरी 2026

Unsent — दिल का ड्राफ्ट

 

मैंने अपने एहसासों को
हर रात
ईमेल के ज़रिये भेजा है तुम्हें
बिना Subject के,
ताकि तुम सीधे दिल तक पहुँच सको।

हर शब्द लिखते वक़्त
उँगलियाँ काँपती थीं,
जैसे Send बटन
किसी इकरार का दरवाज़ा हो।

मैंने लिखा
आज चाँद कुछ ज़्यादा ही
तुम्हारी तरह लग रहा है,
मैंने लिखा
तुम्हारी ख़ामोशी भी
मेरे दिन भर की थकान उतार देती है।

पर हर बार
मेरे एहसास
रास्ते में ही ठहर गए
क्योंकि तुम्हारा Inbox
पहले से भरा हुआ था
नामों से,
वादों से,
और शायद
उन ख़्वाबों से
जिनमें मेरा ज़िक्र नहीं था।

मैंने फिर भी भेजना नहीं छोड़ा,
क्योंकि प्रेम
Reply का इंतज़ार नहीं करता,
वह तो बस
पहुँचने की उम्मीद पर
ज़िंदा रहता है।

शायद किसी दिन
तुम पुराने मेल्स हटाओ,
कुछ यादें Archive में डालो,
और तब
मेरे एहसासों की कोई पंक्ति
अनायास ही खुल जाए

तब तुम पढ़ोगी
कि कोई था
जो तुम्हें पाने की नहीं,
सिर्फ़
तुम तक पहुँचने की
कोशिश करता रहा।

"वो जो 'Drafts' में रह गए जज्बात थे,

उन्हें भी पता था कि

मंज़िल शायद नहीं मिलेगी।

पर कलम ने हार नहीं मानी,

क्योंकि कुछ प्रेम कहानियाँ

मुकम्मल होने के लिए नहीं,

बस महसूस किए जाने के लिए लिखी जाती हैं।"

 

और अगर कभी
तुम्हें लगे
कि किसी अनजान रात
दिल बेवजह भारी है
समझ लेना,
कोई मेल, बिना खुले ही
तुम्हारे भीतर
पहुँच गया था।

4 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

बहुत दिल से लिखी रचना है- प्रयोगवादी

M VERMA ने कहा…

धन्यवाद

Aman Peace ने कहा…

Wah!

M VERMA ने कहा…

धन्यवाद