Saturday, April 10, 2010

सूरज का महज़ एक तपन ~~

कब तक

सहमीं रहेंगी

नदी के कगारों से

अजस्त्र धारायें

अवरोधों के उस पार

कहीं तो नवल क्षितिज होगा.

.

अन्धेरे के तमाम त्रासदियों को

सहने के बाद

जब भी यह रात ढलेगी;

अंतस के प्राची से

जब भी नूतन भोर झांकेगा,

मैं जानता हूँ

सूरज का महज़ एक तपन

काफी है पिघला देने को

उन गहनतम दीवारों को भी

जो हमें अब तक

बौना बनाये रखे हैं

.

सार्थक प्रयत्न

कभी भी निष्फल नही होता

उजास की किरण

देर-सबेर

हम तक भी पहुँचेगी

आखिर कब तक

गर्म हौसलों को

ठंडी बर्फ़ की परतें

छुपा सकती हैं भला

कब तक ........

(यह रचना सन 1984 मे लिखी थी)

41 comments:

रश्मि प्रभा... said...

कहीं होगा वह नवल क्षितिज ....... मुझे विश्वास है, तभी तो कलम कह रही है

हरकीरत ' हीर' said...

सच कहा उजास की किरण देर सबेर हम तक भी पहुंचेगी .....प्रयत्न कायम रहना चाहए .....यही तो जीवन है ....!!

सशक्त रचना ....!!

सुलभ § सतरंगी said...

जड़ जमाये गहनतम दीवारों का पिघलना जरुरी है.
कोशिश सबको करनी होगी, उस प्रकाश/तपन को पाने के लिए.

sandhyagupta said...

आखिर कब तक
गर्म हौसलों को
ठंडी बर्फ़ की परतें
छुपा सकती हैं भला
कब तक ........

Sundar aur prabhavi abhivyakti.

sangeeta swarup said...

बहुत प्रभावशाली और नयी उर्जा देने वाली अभिव्यक्ति.....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

सूरज का महज़ एक तपन
काफी है पिघला देने को
उन गहनतम दीवारों को भी

बहुत सुन्दर रचना है ... आशा की बात करती हुई ... यह भोर अवश्य आयेगा ... पर शयद यह भोर बहार से नहीं अपने अन्दर से ही आना है ... जब हरेक इन्सान में सच्चाई, इंसानियत और ज्ञान का भोर आयेगा तो अँधेरा खुद व खुद मिट जायेगा ....

श्याम कोरी 'उदय' said...

..... आशा के भाव ... उम्मीद की किरण ... नवल क्षितिज ....बेहद प्रेरणादायक रचना!!!!

Suman said...

nice

दिगम्बर नासवा said...

सार्थक प्रयत्न कभी निष्फल नही होता ....
सच कहा है ... बहुत ही अनुपम रचना ...

वन्दना said...

बहुत ही गहन और सकारात्मक दिशा देती रचना।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत ही आशावादी कविता लिखी है आपने पसंद आई शुक्रिया

संजय भास्कर said...

नयी उर्जा देने वाली अभिव्यक्ति.....

anjana said...

सुन्दर रचना ...

M VERMA said...
This comment has been removed by the author.
Razia said...

बेहतरीन रचना आशा जगाती

डॉ टी एस दराल said...

सकारात्मक सोच प्रदर्शित करती रचना ।
बढ़िया ।

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

सार्थक प्रयत्न

कभी भी निष्फल नही होता

उजास की किरण

देर-सबेर

हम तक भी पहुँचेगी

-------------
ओह सन चौरासी की लिखी है तो यह ढ़ाई दशक में सिद्ध हुआ कि नहीं?

आमीन said...

1984 me to mera janam hua tha. usi wakat likhi gayi hogi!!!! :-)

waise behatrin hai.

रवि कुमार, रावतभाटा said...

वो सुबह कभी तो आएगी...
बेहतर रचना...

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 11.04.10 की चर्चा मंच (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/

हिमांशु । Himanshu said...

बेहद खूबसूरत रचना ! आभार ।

Dimpal Maheshwari said...

काबिलेतारीफ है प्रस्तुति।.सारी रचनाये आपकी बहुत ही अच्छी है|

प्रवीण पाण्डेय said...

नवल क्षितिज उदित होगा या ढूढ़ना पड़ेगा ।

ई-गुरु राजीव said...

आप को झूठ नहीं बोलना चाहिए, यह 1984 की रचना कैसे हो सकती है !!
यह तो हमें आज भी प्रेरणा दे रही है. :)
यह तो सर्वकालिक हुई.
समय इसे नहीं बाँध पायेगा.
भले ही इसका जन्म १९८४ में हुआ हो, पर यह अमर है.

भूतनाथ said...

lajawaab kar diyaa aapne,sach....

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

सार्थक प्रयत्न
कभी भी निष्फल नही होता
िउजास की किरण
देर-सबेर
हम तक भी पहुँचेगी
आखिर कब तक
गर्म हौसलों को
ठंडी बर्फ़ की परतें
छुपा सकती हैं भला
कब तक ....... बहुत सुन्दर और सकारात्मक सोच वाली रचना----

सुमन'मीत' said...

सार्थक प्रयत्न
कभी भी निष्फल नही होता
उजास की किरण
देर-सबेर
हम तक भी पहुँचेगी
आखिर कब तक
गर्म हौसलों को
ठंडी बर्फ़ की परतें
छुपा सकती हैं
भला कब तक ........

बहुत सुन्दर

JHAROKHA said...

karm karte rahana hi hamare jeevan ka uddeshy hai.vo subah kabhi to aaygi

दीपक 'मशाल' said...

sach gambheer ho gaya main bhi padhkar..

लता 'हया' said...

shukria,
tapan acchi lagi.

बेचैन आत्मा said...

अवरोधों के उस पार
कहीं तो नवल क्षितिज होगा.
--वाह! अच्छी कविता।

Jyoti said...

उजास की किरण देर-सबेर हम तक भी पहुँचेगी.......

बहुत सुन्दर रचना...........

Babli said...

सार्थक प्रयत्न
कभी भी निष्फल नही होता
उजास की किरण
देर-सबेर
हम तक भी पहुँचेगी..
बिल्कुल सही कहा है आपने ! सूरज की किरण हम सभी पर ज़रूर पहुंचेगी ! बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ उम्दा प्रस्तुती!

Vijay Kumar Sappatti said...

varma ji

aapki is rachna par main nishabd hoon ...kya kahu , mere paas tareef ke liye shabd nahi hai , ye kavita tareef se upar hai .. aapki lekhni ko mera salaam ...

aabhar aapka

vijay

p.s. pls meri ek kavita ko aap bhojpoori me translate kariyenga ..jald hi likhta hoon

रचना दीक्षित said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति बहुत गहरी बातें
गज़ब की जादूगरी शब्दों से !!बहुत प्रभावशाली और नयी उर्जा देने वाली सशक्त रचना

Parul said...

is tapan mein nikhar gayi nazm!

Parul said...

is tapan mein nikhar gayi nazm!

ज्योति सिंह said...

harkirat ji ki baat se main bhi sahmat hoon ,chintan karne laayak baate hai , rachna sundar lagi .

विनोद कुमार पांडेय said...

क्या बात है वर्मा जी शब्दों से खेलना कोई आप सीखे और साथ ही साथ चंद बेहतरीन भावनाओं के साथ बेहतरीन प्रस्तुति ...धन्यवाद इस सुंदर क्षणिकाओं के लिए....आभार

महफूज़ अली said...

बिलकुल सही कहा आपने.... कहीं तो नवल क्षितिज होगा....

बहुत सुंदर कविता....

neera said...

प्रेरित करती, आशा जगाती एक सुंदर रचना...