Wednesday, April 7, 2010

छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ (भोजपुरी)

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ

घर में दरार बा बाकी सब ठीक हौ

अबकी छुट्टी मिली त आइब जरूर

हम देत बाई तोहके जबान अम्मा

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

.

भोरहरी में उठे क आदत तूँ छोड़ा

मीठ बोल-बतिया से सबके तूँ जोड़ा

कब ले बितईबू तूँ दिन मड़ई में

लउटब त बनवाईब मकान अम्मा

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

.

गिरल बरधा भी उठ जाई हो अम्मा

भर-भर नाद सानी खाई हो अम्मा

सींग आ गयल होई अब त बछवा के

करवाई दीह ओकार नथान अम्मा

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

आज उम्र के इस पड़ाव पर माँ के आंचल मे सिर रखने की इच्छा हुई. मेरे लिये भोजपुरी माँ के आंचल से कम नहीं है.

27 comments:

वाणी गीत said...

औरी सब ठीक बा ...
मत कर जियरा हलकान अमा ...
ढेर दिन बाद ऐसन गीत पढले बानी ...
नीक बा ...!!

M VERMA said...
This comment has been removed by the author.
श्याम कोरी 'उदय' said...

...बहुत सुन्दर, प्रभावशाली भाव, प्रसंशनीय रचना!!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा
काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा

चित्र बिल्कुल सही बोलता है!

Razia said...

छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ
बहुत सुन्दर भाव

अजय कुमार झा said...

जाने का का तो कह गईनी एतना में वर्मा जी ...बहुते गज़ब बा बहुते अजब बा ।
अजय कुमार झा

sangeeta swarup said...

मन के भाव बहुत खूबसूरती से लिखे हैं....और भाषा की मिठास तो क्या कहिये...

बेचैन आत्मा said...

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा
काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा
छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ
घर में दरार बा बाकी सब ठीक हौ
...वाह, क्या बात है!

Sonal Rastogi said...

वर्मा जी ,

हिंदी में अनुवाद दे देते , कुछ समझ में आ गई कुछ छुट गई

विनोद कुमार पांडेय said...

वर्मा जी ये हुई दिल की आवाज़ अपनी घरेलू बोल चाल में अगर कविता हो तो बात ही क्या है..
और भावपूर्ण तो हमेशा की तरह जैसे आप की रचनाएँ होती है....सुंदर रचना के लिए बधाई हो बनारसी चाचा जी...प्रणाम

Jyoti said...

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा...


बहुत सुन्दर.........

सुलभ § सतरंगी said...

मन खुश हो गईल वर्मा जी.
ऐसन कविता/गीत पढ़ के.
आपन बोली देसी भाव
बहुत बहुत बधाई.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

मुझे भोजपुरी पूरी तरह से समझ में नहीं आती है ... इसलिए एक-दो पंक्ति नहीं समझ पाया ! पर ज्यादातर समझ पाया और अच्छा लगा ...
अंग्रेजी के ज़माने में भी भारतीय भाषायों में लिखी कविता की अपनी एक अलग सौंदर्य है ... और अपनी मातृभाषा तो हमें अपनी पहचान दिलाती है ... हमें उस मिटटी के सुगंध से अनबरत जोड़े रखती है, जिससे हमारा रिश्ता अगर कट जाये तो हम एक कटी पतंग से ज्यादा तो और कुछ नहीं !

दिगम्बर नासवा said...

वाह ऐसन गीत पहीले नही पॅडबे ना ..बहूत मजेदार बा ...
लाजवाब वर्म जी ... ये गीत कोई गेया सके तो और भी मजेदार लगेगा ...

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वाह पढने में बहुत अच्छी लगी ...शुक्रिया

ताऊ रामपुरिया said...

वाह बहुत सुंदर रचना.

रामराम.

Prem Farrukhabadi said...

Verma ji,
khoob gaon ki sair kara dii.Badhai!!

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा
काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा
छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ
घर में दरार बा बाकी सब ठीक हौ
अबकी छुट्टी मिली त आइब जरूर
हम देत बाई तोहके जबान अम्मा
मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा

शरद कोकास said...

भोजपुरी का सौन्दर्य इस रचना में बहुत सुन्दर रूप मे प्रस्तुत है ।

mukti said...

जी खुश हो गया भोजपुरी की रचना पढ़कर.

Babli said...

वाह वर्मा जी बहुत बढ़िया लगा भोजपुरी कविता! बड़े दिनों के बाद भोजपुरी कविता पढने को मिला! नए अंदाज़ में बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना प्रस्तुत किया है आपने जो सराहनीय है!

संजय भास्कर said...

VERMA JI JWAAB NAHI AAPKA
भोजपुरी का सौन्दर्य इस रचना में बहुत सुन्दर रूप मे प्रस्तुत है ।

हिमांशु । Himanshu said...

लोक-सम्पृक्त चेतना ऐसी मनोहारी रचना देती ही है !
भोजपुरी की इस रचना को प्रस्तुत कर मन जीत लिया आपने, मुरीद भी बनाया ! जितना सहज संवाद इस रचना में भोजपुरी में संभव था, इतना प्राकृतिक और सहज शायद संभव हो नहीं पाता किसी और भाँति !

प्रविष्टि का आभार ।

singhsdm said...

औरी सब ठीक बा ...
मत कर जियरा हलकान अमा ...
वाह....वाह.......
लोकभाषा का अपना ही स्वाद है........मिसरी की डाली की तरह...बस जबान पर रख लो.....मज़ा लेते रहो....!
भोजपुरी क्षेत्र में ही होने की वज़ह से यह रचना और भी आनंददायक लगी आभार.......

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

नमस्कार वर्मा जी ह्रदय की भावनाओं की जिस तरह आपने शब्द दिए हैं अदभुद है ,,,बहुत ही सुन्दर रचना गहरे तक छूती हुयी

सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

दीपक 'मशाल' said...

Verma sir, bahut deri se aane ke liye muafi chahta hoon. Kshetreeya bhasha ke roop me aapne jis tarah se bhojpuri jaisi samraddh boli ka ye geet, apne gaanv se door base vyakti ke dard ke sath likkha hai wo avismarneeya rahega.

अनामिका की सदाये...... said...

bahut pyara aur masoom sa geet maa k liye bahut acchha laga padh kar..ha.n ab tak me bhojpuri ko ek aasan bhasha samajhti thi..lekin aapki bhojpuri padh kar jana ki ye to hamare liye mushkil hai. halanki puri rachna samajh aa gayi he.

mridula pradhan said...

bahut achche.