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खु़द के पहलू में आग रखा करो
शफ्फ़ाक़ वज़ूद है दाग़ रखा करो
बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
साथ अपने एक नाग रखा करो
धूप से दोस्ती कर ली तुमने तो
एहसासों में अपने बाग़ रखा करो
कोई और हिसाब क्यूँ रखेगा भला
खु़द अपना गुणा-भाग रखा करो
ज़ेहन की नसें फटें क्यूँ शोर से
शिराओं में भैरव राग रखा करो
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