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बुधवार, 4 नवंबर 2026

विकास त रजऊ सैतालीस में आई (भोजपुरी)

अबही न आई, तबही भी न आई,

विकास त रजऊ सैतालीस में आई।

 

खुलल बा गटर, त बंद करा शटर,
घरे जा के सुत जा, ओढ़ के रजाई।

पीछे त बा गडहा, आगे हौ चढ़ाई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।

 

इलाजवा क अइसन का बा जल्दी,
मरले के बाद त मिल जाई दवाई।

लौटबा कईसो त मार देई महँगाई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।

 

बोतल में हौ पानी, हेराय गयल रोटी,
नून, तेल, लकड़ी क हो गयल मनाही।

तनी बतावा, लइका-बच्चा का खाई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।


ओनकर मौसम रंगीन रही, का करबा,
तोहार जिनगी मलीन रही, का करबा।
चुप रहा, जाके करा अब खेत जुताई,
विकास त रजऊ सैतालीस में आई।