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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

अनधिकृत साँसेँ

 

अख़बार के पहले पन्ने पर

प्राइम समाचार था—

 

CID ने एक घर में छापा मारा

और पाँच व्यक्तियों को

अनधिकृत रूप से

साँस लेते पाया।

 

सरकार ने

इसे देशद्रोह घोषित कर दिया

और इन साँसों के पीछे

विदेशी फंडिंग की आशंका से

इंकार नहीं किया।

 

मीडिया में

बहस छिड़ गई—

 

ख़ास लोगों के लिए

आरक्षित साँसों की

तस्करी में

किन लोगों का हाथ है?

 

और

इन पाँच आम लोगों तक

ये पहुँची कैसे?

 

अख़बार के

आख़िरी पन्ने पर

एक छोटी-सी ख़बर

यह भी थी—

बलात्कार की शिकार

मासूम की

मौत हो गई।

सोमवार, 21 सितंबर 2026

तबेले में शिक्षा

 

अरसे
से गुम थी
पर अंततः
एक तबेले में
खुद अधमरी होते हुए भी
अधमरी गाय को
घास डालती मिली—
शिक्षा।

भूसे
के ढेर के नीचे
मृतप्राय—
उसने
अपना आवास
बना लिया था।

वेंटीलेटर भी
मुहैया नहीं कराया गया,
क्योंकि
आँकड़ों ने उसे
सम्पूर्ण स्वस्थ
घोषित किया हुआ था।

उसका अस्तित्व
प्रकाश में आते ही
मीडिया के माइक ने
उसे घेर लिया।

सवालों की
बौछार होने लगी—
“
आपको
कैसा लग रहा है?
आप यहाँ हैं,
पर छात्र कहाँ हैं?”

कराहते हुए
जवाब मिला—
“
बच्चे
टूटी सड़क के कारण
नहीं आ पा रहे हैं।”

मीडिया
का माइक
तुरंत
सड़क की ओर मुड़ गया—
पर सड़क भी
आँकड़ों में
एकदम दुरुस्त थी।

तभी
एक बच्चा
कीचड़ में फिसलकर
सड़क के किनारे जा गिरा।

माइक
उसकी ओर बढ़ा—
पर बच्चा
आँकड़ों में
स्कूल पहुँच चुका था।

और शिक्षा?
वह अब भी
तबेले में
अधमरी अवस्था में
अधमरी गाय को
घास डाल रही थी।