संस्कारित-सभ्यों के बीच आदमखोर कबीले क्यूं हैं ?
शहर त्रस्त था अँधेरों से।
उन्होंने संविधान में संशोधन किया और अँधेरे का नाम उजाला रख दिया।
फिर मीडिया ने घोषित कर दिया—
अब शहर में अँधेरा नहीं है, सिर्फ़ उजाला दिखाई देता है।
एक टिप्पणी भेजें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें