बुधवार, 29 जुलाई 2026

गाली से आगे

 

हवा में गूँज रही है
एक पंक्ति
"लड़की होकर गाली दे रही है।"

पर इससे पहले
किसी ने कब कहा था
"लड़का होकर गाली दे रहा है?"

या फिर
"लड़की होकर भी चुप क्यों रहती है?"

उनका प्रतिकार
यदि गालियों की शक्ल में भी फूटा,
तो याद रखिए
हर गाली से पहले
बहुत-सी अनसुनी चीखें
दम तोड़ चुकी होती हैं।

मैं गालियों का पक्षधर नहीं,
प्रतिकार का पक्षधर हूँ।

फिर भी
गालियाँ देती लड़कियाँ
मुझे अच्छी लगती हैं,
क्योंकि गालियाँ
इस मुक्ति की
पहली सीढ़ी भर हैं।

प्रतिकार के इस स्वर को
एक दिन
गालियों से परे
अपना मुहावरा गढ़ना होगा।

तंग गलियों से निकलकर
खुले आसमान में
अपनी आवाज़ की
पहचान बनानी होगी।

17 टिप्‍पणियां:

Sweta sinha ने कहा…

गलत तो गलत है इसकी सराहना किसी भी सूरत में जाएज़ नहीं। किसी भी उम्र का लड़का हो या लड़की भद्दी गालियॉं देते हुए आपको कैसे अच्छा लग सकते है सर?
माना आपको सिस्टम से ,सत्ता से या किसी के भी कार्य प्रणाली से शिकायत है आप विरोध कीजिये न और भी तरीके हैं हमने तो देखा ही उसी भीड़ में और भी थे ।
प्रतिकार करने के इस तरीके की वाहवाही क्यों?
क्षमा चाहेंगे सर हम सहमत नहीं ।
सादर।

M VERMA ने कहा…

जब दबे बीज़ धरती का सीना फाड़ते हैं तो दरारे पड़ती हैं पर उपरांत विकास बहुत सुसंगत होता है
विस्फोट पीड़ादायक होता है

M VERMA ने कहा…

प्रतिकार के इस स्वर को
एक दिन
गालियों से परे
अपना मुहावरा गढ़ना होगा।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

गलत और सही की परिभाषाएं ही जब बदल रही हों तो ऐसा होना लाजमी है | तठस्थ होना और देखते सुनते अपनी परिभाषाएं गढ़ लेना अब हमारी फितरत हो गई है |

Anita ने कहा…

गालियाँ देतीं लड़कियाँ यह सिद्ध करती हैं कि न उन्होंने घर पर कुछ सीखा न स्कूल में, यानि की उन्हें कुछ सिखाया ही नहीं गया, शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल

M VERMA ने कहा…

तटस्थता सबसे घातक है

M VERMA ने कहा…

गालियाँ सहती ल़डकियों भी हैं

Razia Kazmi ने कहा…

प्रतिकार जरूरी है
गालियों का रूपांतरण भी जरूरी है

M VERMA ने कहा…

सही कहा

Digvijay Agrawal ने कहा…

गालियों की तंग गलियों से निकलकर
हमे नई पहचान एक बनानी होगी
वंदन

M VERMA ने कहा…

जी यही सत्य है

Aman Peace ने कहा…

Wah!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Digvijay Agrawal ने कहा…

 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में  शनिवार 01अगस्, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

हरीश कुमार ने कहा…

किसी की अभद्र भाषा का समर्थन करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि संवाद की मर्यादा को कमज़ोर करना है। असहमति हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन वह शालीनता और तर्क के साथ व्यक्त होनी चाहिए। यदि कोई भगवान, प्रधानमंत्री या किसी भी व्यक्ति के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उसका महिमामंडन करने के बजाय उसकी आलोचना होनी चाहिए। समाज सम्मानजनक संवाद से आगे बढ़ता है, अपशब्दों से नहीं।

M VERMA ने कहा…

बिलकुल सही पर यह भी तो सोचना होगा कि इन गालियो का जन्मस्थान कहाँ है? यह समाज और शीर्षपदस्थ जब गालियो को अपना कर सत्ता तक पहुंच रहे हैं तो फिर ..........