गुरुवार, 28 मई 2026

आम आदमी नंगा है

 

बाकी सब भला चंगा है,
बस आम आदमी नंगा है।

 

महलों में उत्सव जारी है,
सड़कों पर फैला दंगा है।

 

इतना पाप धुला जल में

कि मैली हो गई गंगा है।

 

बेरंग भूख की बस्ती में

आश्वासन रंग-बिरंगा है।

 

समझ रहे जिनको दाता

सच में वो भिखमंगा है।

 

जिसको उडता देख रहे

वह महज एक पतंगा है।

 

धरती में है बीज बहुत

यह तो एक सारंगा* है।

 

* सारंगा = एक प्रकार की छोटी नाव जो एक ही लकड़ी की बनती है

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