इश्क़ इकतरफ़ा नहीं होता,
वह सिर्फ़ अधूरा होता है
जब तक उसके भीतर
भावनाओं का भार कम होता है।
ब्रह्मांड का एक सरल-सा नियम है—
हर कण
हर कण को खींचता है।
कोई किसी से बिल्कुल अलग नहीं,
बस दूरियाँ बढ़ जाती हैं,
या फिर
द्रव्यमान कम पड़ जाता है।
इंसान भी तो कण ही है—
भावनाओं से बना हुआ,
यादों से भरा हुआ,
उम्मीदों की परिक्रमा करता हुआ।
कभी दिल हल्का पड़ जाता है,
कभी एहसासों का वजन घट जाता है,
और हम समझ लेते हैं—
इश्क़ एकतरफ़ा है।
लेकिन सच यह है—
जहाँ आकर्षण सच्चा हो,
वहाँ खिंचाव देर से सही,
होता ज़रूर है।
जिस दिन
जज़्बातों का द्रव्यमान बढ़ेगा,
और अहंकार की दूरियाँ घटेंगी,
उस दिन
वो भी महसूस करेगा
तुम्हारी ओर खिंचती हुई
अपने दिल की कक्षा।
क्योंकि प्रेम
कोई चमत्कार नहीं—
यह भी प्रकृति का नियम है।
और हाँ,
इश्क़ में भी
गुरुत्वाकर्षण
चुपचाप काम करता है।

2 टिप्पणियां:
Wah!
Thanks 😊 🫂
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