इश्क़ दिल में हो तो फिर पूरा नहीं होता
अधूरा रह के भी ये इश्क अधूरा नहीं होता
कत्ल नज़रों से भी होते देखे हैं हमने
हर किसी क़त्ल का कारण छुरा नहीं होता
एक छुअन से ही सिहर उठते हैं दीवाने
हर किसी नशे का कारण सुरा नहीं होता
दिल अगर टूटे तो धड़कन कम नहीं होती
हर किसी दर्द का मतलब बुरा नहीं होता
खामोशी भी कभी छेड़े मधुर सरगम को
हर किसी साज़ में होना तम्बूरा नहीं
होता
जिसे पा लो तो कई बार क़दर खो जाए
हर कोई ख़्वाब हक़ीक़त में पूरा नहीं
होता
लोग कहते हैं इसे बस कोई अफ़साना है
‘वर्मा’ इश्क़ का किस्सा अधूरा नहीं होता
फोटो : AI

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें