Monday, June 6, 2011

उसे खुद की तलाश है …. (An Endless Search)



वह गुम है,

मगर उसे

स्वयं की गुमशुदगी का

एहसास ही नहीं है.

वह अक्सर

घर से निकलता है

खुद की बजाय

किसी और की तलाश में.

उसकी पहचान आसान नहीं है

क्योंकि उसकी शक्ल प्रतिपल

बदलती रहती है,

कभी वह मिलता है

खुद के खिलाफ़

हल्फ़िया बयान देते हुए;

कभी वह मिलता है

खुद ही को व्याख्यान देते हुए,

वह अक्सर

स्वयं पर हँसता है;

आनरकीलिंग के हर केस में

वही फँसता है,

वह पेड़ों से बातें करता है;

वह नदी से मुलाकातें करता है

वह रात होने पर

सुबह का इंतजार करता है

सारी रात जागकर;

अक्सर वह

अगवानी करता है सूरज का

पूरब दिशा में भागकर,

अगले चौराहे पर

पड़ी हुई एक लाश है

अब वह भागेगा उस ओर

क्योंकि

उसे खुद की तलाश है

जी हाँ !

उसे खुद की तलाश है.

54 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यह अंतहीन तलाश क्या कभी पूरी होगी ... हर लाश में खुद को तलाशना ... इंसान का ज़मीर बचा ही कहाँ है ?

मैंने आपकी रचना में ज़मीर को देखा है खुद को तलाशते हुए ... हर पाठक इस रचना में नयी तलाश कर सकताहै .. गहन अभिव्यक्ति

नीरज मुसाफ़िर said...

क्या बात है--- खुद की तलाश है।

रश्मि प्रभा... said...

आनरकीलिंग के हर केस में

वही फँसता है,

वह पेड़ों से बातें करता है;

वह नदी से मुलाकातें करता है

वह रात होने पर

सुबह का इंतजार करता है

सारी रात जागकर;... gudh abhivyakti

sonal said...

हर किसी के लिए अलग अर्थ रखती ये रचना ....बहुत खूब

vandan gupta said...

और ये तलाश है कि पूरी नही होती……………बेहद गहन अभिव्यक्ति।

दिगम्बर नासवा said...

इंसान की अंतहीन तलाश क्या कभी ख़त्म हो पाती है ... अपनी तलाश और अपनी पहचान तो तलाश करना बदलते परिवेश में शायद संभव नही होता ... लाजवाब रचना है वर्मा जी ...

डॉ टी एस दराल said...

इस मृत्यु लोक में इन्सान खुद को ही कहाँ पहचान पाया । यह तलाश तो जारी रहेगी अनंत तक ।

मनोज कुमार said...

जिसकी यह तलाश पूरी हो जाती है उसकी और कोई तलाश बचती है क्या?

अरुण चन्द्र रॉय said...

बेहद खूबसूरत कविता .. बहुत सुन्दर भाव... आप हतप्रभ कर देते हैं...

Arun sathi said...

bahut hi bhawpoorn...

देवेन्द्र पाण्डेय said...

वह और कोई नहीं, एक बेचैन आत्मा है। जब तक बेचैन है समझो जिंदा है।
....बढ़िया लगी कविता।

Razia said...

उसे खुद की तलाश है ..
bahut sundar

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आज तो टिप्पणी मे यही कहूँगा कि बहुत उम्दा रचना है यह!

एक मिसरा यह भी देख लें!

दर्देदिल ग़ज़ल के मिसरों में उभर आया है
खुश्क आँखों में समन्दर सा उतर आया है

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 07- 06 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच

वीना श्रीवास्तव said...

खुद की तलाश ही मुश्किल है...

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बहुत खूब..... एक अंतहीन सफ़र ..और मंजिल की तलाश

प्रवीण पाण्डेय said...

हम तो न जाने कितना खो जाते हैं इस जीवन में।

वाणी गीत said...

दुनिया की भीड़ में खुद अपने अस्तित्व की तलाश करता आदमी ...
खुद में अपने आपको तलाश करता आदमी ...
गहन भाव !

udaya veer singh said...

utkrisht bhvnaon ka prakatikaran sanjidagi ke sath achha laga .
shukriya .

Udan Tashtari said...

बस, यह अनवरत तलाश है...

बेहतरीन रचना..

सदा said...

वह रात होने पर

सुबह का इंतजार करता है

सारी रात जागकर

बहुत खूब कहा है ।

निवेदिता श्रीवास्तव said...

यही आज के मानवीय जीवन की विडम्बना है .... औरोकी तालाश में भटकता इन्सान खुद को ही तलाशना भूल जाता है ......अच्छा लगा पढ़ कर ...

रंजना said...

अंतहीन तलाश...

सचमुच यही मरीचिका तो जीवन को खींच मृत्यु तक पहुंचाती है...

गंभीर चिंतनीय रचना...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

एक अंतहीन तलाश स्वयं की .....

' यह मैं नहीं एक तस्वीर है

संयोग है कि मुझसे मिलती है '

Kailash Sharma said...

बहुत सच कहा है...आज हर व्यक्ति अपनी तलाश में ही भटक रहा है..बहुत गहन और भावपूर्ण प्रस्तुति..आभार

Jyoti Mishra said...

truly an endless search but its of vital importance.... Introspection is must.

I have also written on the same topic
Plz have a look
http://jyotimi.blogspot.com/2011/02/introspection.html

ज्योति सिंह said...

अब वह भागेगा उस ओर

क्योंकि

उसे खुद की तलाश है

जी हाँ !

उसे खुद की तलाश है.
bahut hi sundar ,gahan abhivyakti .

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण कविता! ख़ुद की तलाश में ...ये बहुत ही मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं!

श्यामल सुमन said...

खुद को तलाशना? चिंतन हेतु नया आयाम - वाह.

सादर
श्यामल सुमन
+919955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Urmi said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

अजय कुमार said...

antheen talaash

Anonymous said...

बेहतर...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी (कोई पुरानी या नयी ) प्रस्तुति मंगलवार 14 - 06 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

साप्ताहिक काव्य मंच- ५० ..चर्चामंच

Smart Indian said...

बेचारा!

Arvind Mishra said...

यकायक स्तब्ध ,स्तंभित करती है कविता ....

ZEAL said...

खुद की तलाश जारी भी रहनी चाहिए। एक जीवन छोटा है खुद को समझने के लिए।

Urmi said...

आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!

Amrita Tanmay said...

शब्दशः तलाश को एक नया आयाम देती रचना ..आपको पढ़ना बहुत अच्छा लगता है..आभार

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

बेहद खूबसूरत कविता .. ........

Vivek Jain said...

क्या बात है, बहुत खूब
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Arvind Mishra said...

यही तो होता आया है सदियों से ..मगर क्यूं क्यूं ...?

amrendra "amar" said...

बेहद गहन अभिव्यक्ति।

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात है.. बहुत बढिया।

***Punam*** said...

अक्सर वह

"अगवानी करता है सूरज का
पूरब दिशा में भागकर,
अगले चौराहे पर
पड़ी हुई एक लाश है
अब वह भागेगा उस ओर
क्योंकि
उसे खुद की तलाश है "

और इस बार शायद यह तलाश ख़त्म हो जाए....!
सुन्दर अभिव्यक्ति....

अनुपमा पाठक said...

तलाश तो अंतहीन है!

Rewa Tibrewal said...

sahi baat kahi apne....hum sab yahin karte hain....

Arvind Mishra said...

शब्दों की बरात ....... :)

Nirantar said...

like thoughts,desire ,search is also never ending

Neeraj Kumar said...

जी हाँ ! उसे खुद की तलाश है... बहुत सही कहा है... मनुष्य मनुष्य को खोजते यहाँ तक पहुँच तो गया है लेकिन उसे पता ही नहीं कहाँ तक पहुँच पाया है... ये उसकी मंजिल है, राह है या वह भटक गया है अपनी निर्धारित राह से...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

अत्यंत अर्थपूर्ण कविता.... स्तंभित करती हुई....
सादर बधाई....

डॉ. जेन्नी शबनम said...

ajab jaddojehad hai, khud ko har taraf talashta insaan...sundar rachna, shubhkaamnaayen.

kavita verma said...

khud ki talash kya kabhi poori hoti hai???

Latest Lok Geet | Bhajan | Kanth Kokila said...

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