Tuesday, June 29, 2010

निश्चल; निर्विकार मैं बिजूका ......



मुझे तैनात किया गया

फसलों को नष्ट करने वाले

अनाहूत पशुओं से रक्षा के लिये;

मुझे तैनात किया गया

खेतों के ऊपजाऊपन को चुराने वालों को

डराने के लिये,

और मैं अविचल खड़ा हो गया

बाहें पसारे; तत्पर (!)

वे मेरे देखते देखते

ऊपजाऊ मिट्टी पर

कब्जा कर लिये

मैं उन्हें रोकना चाहकर भी

रोक नहीं पाया

मेरे देखते देखते

जंगली पशुओं के झुंड ने

धावा बोल दिया

और तहस-नहस कर दिया

मेरे समक्ष उगी फसलों को

शायद मेरे प्रतिकार की

समस्त ताकत जवाब दे गयी थी;

या शायद मेरी अकर्मण्यता

मुझे हिलने नहीं दे रही थी;

या शायद मेरे भय ने

मुझे जड़ बना दिया था,

आज भी मैं खड़ा हूँ निर्विकार

अपने स्थान पर

अपने उत्तरदायित्वबोध से गर्वित

हिल न सकने की हद तक

अपने वजूद से जुड़ा

निश्चल;

निर्विकार

मैं बिजूका ......

59 comments:

अजय कुमार said...

नेता लोग जरूर पढ़ें ।

Razia said...

बहुत सुन्दर प्रतीक का चयन ... आज के हालात का सटीक चित्रण
सुन्दर कविता

Sunil Kumar said...

अपने उत्तरदायित्वबोध से गर्वित ,बहुत सुन्दर

AMAN said...

अच्छी लगी कविता
बहुत सुन्दर

Udan Tashtari said...

उम्दा रचना!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बजुका की जगह भारतीय नेता लिख देते तो भी एकदम सही होता ! बहुत ही बढ़िया व्यंग्य !

विनोद कुमार पांडेय said...

एक नया पन और नई अंदाज में लिखी गई कविता दिल जीत लेती है...वर्मा जी बेहतरीन अभिव्यक्ति...बधाई स्वीकारें

वाणी गीत said...

har chaurahe par khade ye nischal nirviaar bajuke ...
sirf chunav se pahle kuch samay tak inme aa jati hai jaan ...

marmsparshi rachna !

प्रवीण पाण्डेय said...

उत्तरदायित्व और स्थानमुग्धता, दोनों के अन्तर्द्वन्द को उभार दिया है ।

डॉ टी एस दराल said...

घुमाकर बहुत गहरी बात कह गए वर्मा जी ।
अति सुन्दर ।

Asha Joglekar said...

प्रतीक भी सही चुना और व्यंग भी करारा है ।

kshama said...

Shayad ham sabhi apne jeevan me kabhi na kabhi,anchahe sahi,bajuka ban jate hain! Aapne ekdam se aanken khol deen...!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यह रचना हर उस व्यक्ति को इंगित करती है जो बिजूका बन किसी भी घटना से विचलित नहीं होता...सुन्दर प्रतीकात्मक रचना...

Jyoti said...

मैं अविचल खड़ा हो गया बाहें पसारे; तत्पर

बहुत सुन्दर

निर्मला कपिला said...

आज भी मैं खड़ा हूँ निर्विकार

अपने स्थान पर

अपने उत्तरदायित्वबोध से गर्वित

हिल न सकने की हद तक

अपने वजूद से जुड़ा

निश्चल;

निर्विकार

मैं बजूका ......
बहुत खूब । अच्छी रचना के लिये बधाई।

सदा said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति, बधाई ।

हमारीवाणी said...

बहुत बढ़िया!



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vandan gupta said...

वाह्……………गज़ब की प्रस्तुति।

राज भाटिय़ा said...

आप ने बहुत सही लिखा अपनी कविता मै आज के भारत के हालात.....

shikha varshney said...

हर बिजूका को इंगित करती रचना ..बहुत उम्दा.

Unknown said...

bahut hi umda rachna !

kamaal ki rachna !

रंजू भाटिया said...

बहुत बढ़िया बहुत पसंद आई यह ..

Anonymous said...

सरोकारों के साथ खड़ी पंक्तियां...

Parul kanani said...

bahut hi sundar rachna!

दीपक 'मशाल' said...

बहुत ही उम्दा सोच.. कविता के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया इस मुद्दे की तरफ भी..

मनोज कुमार said...

यह कविता काफी मर्मस्पर्शी बन पड़ी है । बिम्ब पारम्परिक नहीं है – सर्वथा नवीन। इस कविता की अलग मुद्रा है, ये करूणा के स्वर नहीं है । यह प्रस्तुत करने का अलग और नया अंदाज है।

KK Yadav said...

प्रतीक-बिम्ब के माध्यम से सुन्दर बात कहती कविता..साधुवाद.

रंजना said...

प्रतीक चयन लाजवाब है....बड़ा ही सटीक चित्रण किया है आपने...

समयचक्र said...

सुन्दर कविता...सटीक चित्रण...

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

बिजूका के बहाने सटीक व्यंग्य।
---------
किसने कहा पढ़े-लिखे ज़्यादा समझदार होते हैं?

Satish Saxena said...

बढ़िया प्रतीकात्मक रचना ! बिजुका से सुनना अच्छा लगा ! शुभकामनायें भाई जी

दिगम्बर नासवा said...

भावनात्मक वर्णन किया है आपने ... एक हारे हुवे इंसान का ... जो चाहता तो है पर कुछ कर नही पाता ... बिजूका हमारे ही मन में है .... हमारी आत्मा में है ....

शरद कोकास said...

बिजूका अपने आप मे एक सशक्त बिम्ब है \ मैने इसका उपयोग भूकम्प से सम्बन्धित एक कविता मे किया है कभी अवसर आया तो ब्लॉग पर दूंगा । यह अच्छा लगा

स्वप्निल तिवारी said...

ek bijooka ke madhyam se aadmi ki akarmyadta pe ek bada prahar kiya aapne..behad shandar lagi yah rachna aapki ..

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ said...

Naman sweekar karein!
Ashish :)

Unknown said...

good poem, it's good to read this poem it trully shows the presents condition whats going on around us it's really a good poem....

Unknown said...

it's such a nice poem. it really shows the current condition of politics whats going on around us it's really a good poem...

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

Sach ke behad kareeb.
---------
चिर यौवन की अभिलाषा..
क्यों बढ रहा है यौन शोषण?

Unknown said...

यह कैसी मजबूरी और लाचारी?... शायद हमारी सभी की कहानी कुछ कुछ ऐसी ही है!... अति सुंदर भाव!

अनामिका की सदायें ...... said...

आज हम भी तो विजुका ही बन कर रह गए हैं.

Anamikaghatak said...

shabd sanyojan ati sundar.......badhai

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बिजूका जैसे अछूते शब्द को भी नही छोड़ा!
--
बहुत सुन्दर!

Arvind Mishra said...

assahaayataa kee hataashaa ko ingit krtee khoobsoorat kavitaa !

पूनम श्रीवास्तव said...

bahut hi satik avam prabhav shali prastutikaran.
poonam

वन्दना अवस्थी दुबे said...

आज भी मैं खड़ा हूँ निर्विकार

अपने स्थान पर

अपने उत्तरदायित्वबोध से गर्वित

हिल न सकने की हद तक

अपने वजूद से जुड़ा

निश्चल;

निर्विकार

मैं बिजूका ...
बहुत-बहुत सुन्दर.

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

कृपया इस शमा को जलाए रखें।
--------
पॉल बाबा की जादुई शक्ति के राज़।
सावधान, आपकी प्रोफाइल आपके कमेंट्स खा रही है।

kshama said...

Kitna sach hai...jab kabhi khud ko pahchaan jane ki koshish karte hain,swayam ko bauna pate hain! Kis qadar khoobi se aapne rachana rachi hai!

Sumit Pratap Singh said...

nice post...

हास्यफुहार said...

अच्छी लगी कविता
बहुत सुन्दर

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Pawan Kumar said...

शिनाख्त की कवायद की कहानी है यह कविता....लम्बी कविता में तारतम्यता बनाये रखना हमेशा ही कठिन होता है मगर आपने पूरी कविता में विषय के साथ ले बरकरार रखी है.......वाकई शानदार कविता है.

अरुण चन्द्र रॉय said...

नए तरह के बिम्ब का प्रयोग करते हैं आप! बिम्ब भी बिलकुल शहर के बीच से उठाते हैं और बहुत कुछ कह जाते हैं ! सुंदर कविता

Razi Shahab said...

sundar kavita

कविता रावत said...

शायद मेरे भय ने मुझे जड़ बना दिया था, आज भी मैं खड़ा हूँ निर्विकारअपने स्थान परअपने उत्तरदायित्वबोध से गर्वितहिल न सकने की हद तकअपने वजूद से जुड़ा निश्चल;निर्विकार मैं बिजूका ..
........ek antheen sangharsh karta bijuka ke manodasha ka samvedansheel chitran ke liye aabhar

समयचक्र said...

बहुत बढ़िया कविता ....

Renu Sharma said...

bahut hi saty kaha hai aapne
shinakht to karni hi padegi.

Anonymous said...

bahut achha likha aapne..
aaj ke waqt or halaat ke upar likha hai...
Meri Nai Kavita padne ke liye jaroor aaye..
aapke comments ke intzaar mein...

A Silent Silence : Khaamosh si ik Pyaas

Dr.R.Ramkumar said...

बहुत सुन्दर!!
बिजूका उर्फ कागभगोड़ा के माध्यम से आपने राजनैतिक विसंगितयों ओर राजनीतिज्ञों की विडम्बनाओं को बहढत्रया अंदाज में प्रस्तुत किया है। बधाई!
अपनी रचना के लिए काग भगोड़ा उर्फ बिजूका के लिए नेट में चित्र खोजते हुए आपके ब्लाग में पहुंचा। आपके चित्र ले रहा हूं। घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान करें।