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मंगलवार, 11 जून 2019

अपराधो पर अंकुश का 'रामबाण'


नवगठित सरकार आरम्भ से ही सक्रिय हो गयी. जनता की परेशानियो को समझने के लिये समितिया गठित की गयी. सभी समितियो ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. सभी समितियो की रिपोर्ट में एक बात उभरकर सामने आयी कि जनता की परेशानी का प्रमुख कारण बढता हुआ अपराध है.
सरकार ने मंत्रिमंडल को अपराध के प्रति चिंतित होने का निर्देश दिया. एक हफ्ते की चिंता प्रक्रिया पूरी की गयी. तत्पश्चात एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में बढते अपराध के प्रति आक्रोश प्रस्ताव पास करने के उपरांत अपराध कम करने के लिये भी चिंतन मनन किया गया. अंततोगत्वा बैठक में अपराध पर अंकुश लगाने का रामबाण ढूढ ही लिया गया. जो प्रस्ताव पास हुआ वह निम्नवत है :
१- छिनैती एवम लूट आर्थिक कारणो से होते हैं और पूंजी को चलायमान रखते है,  इसलिये इसे व्यापार की श्रेणी में शामिल कर लिया जाये.
२- CCTV कैमरे क्योंकि अपराधो के सबसे बडे प्रमाण होते हैं और आंकडो के सम्वर्धन में सहायक होते है, इसलिये तमाम चौराहो से इन्हे हटा लिया जाये.
३- अदालतो में अपराधो के लम्बित समस्त केस जब तक निपट न जाये नये केस दर्ज ही न किये जाये.
४- डिफाल्टर लोन के कारण बैंको को हुए घाटे को टैक्स बढाकर पूरा किया जाये.
५- समस्त मीडिया कर्मियो को अगले चुनाव में पार्टी टिकट देने का वायदा किया जाये.

अन्य अपराधो को भी कम करने के लिये तमाम मंत्रिमंडल सदस्यो से सुझाव मांगे गये है. जिनपर चर्चा अगली बैठक में होना तय हुआ.

गुरुवार, 30 मई 2019

मूर्खता : एक सात्विक गुण

मूर्खता एक सात्विक गुण है, जिसे धारण करने से अपमान की सम्भावना कम हो जाती है. याद रखें अपमानित सदा विद्वत्ता का दुर्गुण धारण करने वाले ही होते हैं. यह अनुवांशिक भी हो सकती है और अर्जित भी. मेरा यह आलेख अनुवांशिक रूप से मूर्खता धारण करने वालों के लिये नहीं है वरन उनके लिये है जो अर्जित मूर्खता के अभिलाषी हैं.
विकीपीडिया भी असमर्थ है इसे परिभाषित करने में :
This article does not cite any references or sources.
इसकी परिभाषा मिले न मिले इससे हर कोई परिचित जरूर होगा. इसे धारण करने से आप कई समस्याओं से निजात पा सकते है या लाभान्वित हो सकते है :
1. आपने अक्सर सुना ही होगा अरे ! वह तो मूर्ख है उसकी बात का क्या बुरा मानना.जिसके  कारण कोई आपकी बात का बुरा न माने   तो वह गुण अर्जित करने में क्या बुराई हो सकती है?
2. विद्वानों के मुख से विद्वत्ता की बातें आम बात है, पर मूर्खता गुण धारण करने वाला अगर भूल से   विद्वत्ता की बात कर दे तो बल्ले-बल्ले.
3. कठिन कार्यों से निजात मिल जाती हैक्योंकि मूर्खों से कोई कार्य नहीं करवाना चाहता है.
4. दो मूर्ख (सात्विक) जब मिलते है तो मूर्खता की एक नई किस्म तैयार होती है.
5. दिमागी तनाव अधिकांश बीमारियों का कारक है, मूर्खता गुण धारण करने वाले दिमागी तनाव की   स्थिति में नहीं आते इसलिये तमाम बीमारियों से बचे रहते हैं.

   इसके अलावा और भी अनेक गुण हैं जो स्वत: ही इस गुण को धारण करने के पश्चात उजागर हो  जायेगी. यदि मैं इसके गुण गिनाता रहा तो इसे अर्जित करने का उपाय रह जायेगा. इस अर्जित    करना  उतना कठिन नहीं है जितना इसे लम्बे समय तक धारण करना. एक नितांत निरीह प्राणी  जिसे  सभ्य संसार गधा कहता है; हमारा प्रेरणा स्रोत हो सकता है. फिर भी कुछ उपाय निम्नवत   हैं
  1. प्रथमत:, अपने स्वरूप को थोड़ा सुधार करके हम इस गुण को प्रदर्शित कर सकते हैं. एक सर्वेक्षण कहता है : 75 प्रतिशत पुरूष, महिलाओं के सौन्दर्य को प्रधानता देते हैं जबकि 75 प्रतिशत महिलायें पुरूष सौन्दर्य का आकलन उसके बाह्य स्वरूप से नहीं बल्कि, आंतरिक विवेक, बुद्धि और मानसिक स्थिति से करती हैं. अत: स्वरूप निर्धारण भी महत्वपूर्ण पहलू है.
  2. जब कभी विद्वत्ता की बातें हों तो शरीक अवश्य हों पर ऐसा प्रदर्शित करें कि कुछ समझ में आया ही नहीं और सही व्यक्तव्य जानते हुए भी अनर्गल व्यक्तव्य जारी करें.
  3. पानी से आधा भरा गिलास आपको आधा भरा नज़र नहीं आना चाहिये वरन वह आधा खाली नज़र आना चाहिये.



  1. याद रखें गंजापन नहीं नज़र आना चाहिये, क्योकि गंजापन बुद्धिमानी का लक्षण माना जाता है. इसके लिये या तो विशेष प्रकार का टोपी पहनना चाहिये या बाल ट्रांसप्लांट करवा लेना चाहिये.
  2. दिन में कई बार नीचे के चित्र जैसा मुँह गोल कर लेना चाहिये और ’आल ईज़ भेल’ गुनगुनाना चाहिये. यह आपके प्रति लोगों की धारणा बदलने में सहायक होगा


कहने को और भी बहुत कुछ था पर क्या करूँ इस चक्कर में कहीं मैं मूर्खता से वंचित करार न दे दिया जाऊँ.
वैधानिक चेतावनी : अतिशय मूर्खता प्रदर्शन आपको नैसर्गिक मूर्ख बना सकता है 

रविवार, 28 अप्रैल 2019

सोच में बम ...

हालात पर
नज़र रखने का वायदा था
समुंदर की सतह पर
इस देश को रखकर
हम नज़र रक्खे हैं कि नहीं?
कीमतें कम करने पर
सवाल आखिर क्यूँ?
डालर की तुलना में
रूपये का कीमत
हम कम रक्खे हैं कि नहीं?
किये वायदे से हम
मुकर तो नहीं रहे हैं
उन्हीं वायदों को फिर से
घोषणापत्रों में
हम रक्खे हैं कि नहीं?
स्वयम्भू हैं हम
हमसे तुम डरना
और ज्यादा सवाल मत करना
वरना क्या पता हम
रात आठ बजे टीवी पर आकर
कह दें ठहाका लगाकर
ये जो तुम्हारे बगल में
तुम्हारी पत्नी बैठी है
आज रात बारह बजे के बाद ........
तुम्हीं बताओ
तुम्हारी सोच में
हम बम रक्खे हैं कि नहीं?
तुम्हें बेशक रूला दिया
पर
अपनी आँखों को भी
हम नम रक्खें हैं कि नहीं?
समुंदर की सतह पर
इस देश को रखकर
हम नज़र रक्खे हैं कि नहीं?

सोमवार, 22 अप्रैल 2019

गालियों की वापसी ....

पहचान कर
बयान देकर वापस लेने के ट्रेंड को
माँ-बहन की अनगिनत गालियाँ
दे डाली मैंने अपने फ्रेंड को
सोचा था मैं उसको
सरप्राईज दूंगा
बाद में अपनी गालियाँ
वापस ले लूंगा,
गालियाँ सुनकर
उसका ब्लडप्रेशर बढ़ गया
पारा भी
सातवें आसमान पर चढ़ गया
आव देखा न ताव
छोड़ दिया उसने अपना
अब तक अर्जित नेह-भाव
गाल पर एक झन्नाटा दिया और
धुन दिया मुझे बे-भाव.
मैं हकबकाया
बदहवास सा उसे बताया
मैं तो गालियाँ वापस लेने वाला था

देखकर मेरा चेहरा मुरझाया
वह मुझपर तरस खाया
और फिर समझाया
तुम्हारी सोच में खामी है
ध्वनि ऊर्जा है, यह नष्ट नहीं होती
यह तो वन-वे अनुगामी है
बयान, कथन, गाली-वाली
इनकी कोई वापसी नहीं है
ये नहीं हैं महज़ जुगाली
इसलिए
जब भी मुँह खोलो
सोच समझ कर बोलो
जी हाँ, सोच समझ कर बोलो  

cartoon pic : साभार गूगल 

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

चुप रहिये वे कुछ बोलने जा रहे हैं …..


चुप रहिए
वे कुछ बोलने जा रहे हैं
उपलब्धियों को वे
तौलने जा रहे हैं
भाइयों और बहनों
हमारा देश स्मूथली 'रन' कर रहा है
देखते नहीं कितनी आसानी से अपना काम
'गन' कर रहा है
क्या कहा ?
बलात्कार बहुत ज्यादा हुआ है
अरे! इतना भी नहीं पता
उम्मीद से बिल्कुल आधा हुआ है
घोटाले-घोटाले क्यूँ चिल्ला रहे हो
तुम तो विरोधियों से सुर मिला रहे हो
किसी देश की अच्छी अर्थव्यवस्था
और घोटालों में अभिन्न नाता है
घोटालो का सकारात्मक पहलू
क्या तुम्हे नज़र नहीं आता है
सबसे बड़ी उपलब्धि तो देखो
अब हम विश्वस्तर के घोटालें करते हैं
सामूहिक हत्याकांड पर कौन है
जो सवाल खड़ा कर रहा है
यकीनन कोई आपके कान भर रहा है
जनसँख्या वृद्धि के इस दौर में
सामूहिक हत्याकांड
व्यापक प्रभाव छोड़ते हैं
परिवार नियोजन कार्यक्रम को
सही दिशा में मोड़ते हैं
कुछ न होने से तो अच्छा है
कि कुछ होता रहे
क्या आप चाहते हैं कि
हमारा देश सोता रहे
मन में कोई भ्रम मत पालिए
लगे हाथों इस बात पर भी नज़र डालिए
विश्व में सबसे ज्यादा हम
जांच कमीशन बिठाते हैं
अरे! कभी कभी तो
जांच कमीशन की जांच के लिए भी
जांच कमीशन ले आते हैं
हमें पता था तुम चिल्लाओगे
मंहगाई का मुद्दा जरूर लाओगे
मानता हूँ मंहगाई बढ़ी है
कीमते आसमान तक चढी हैं
समस्यायें हो रहीं हैं मोटी
आम आदमी से दूर हो रही है रोटी
महानुभावों बढ़ी कीमतों के साथ
घटी कीमतों पर भी तो नज़र डालो
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में हमने
रूपये की कीमत को धूल चटा दिया है
बैंक जमा राशि पर ब्याज प्रतिशत घटा दिया है
कीमत घटने का सबसे बड़ा प्रमाण ले लो
बिल्कुल मुफ्त में जब चाहो
किसी का प्राण ले लो
अरे! हमने तो रोटी से ज्यादा
आदमी को अहमियत दिया है
इंसान की कीमत घटाकर तभी तो
शून्य नियत किया है
.
जी हाँ!
शून्य नियत किया है

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

हमारी सुरक्षा व्यवस्था तो चाक-चौबन्द है ~~


हमारी सुरक्षा व्यवस्था तो
चाक-चौबन्द है.
देखते नहीं हमने
हर गली;
हर नुक्कड़;
हर चौराहे पर
बैरकें लगा रखी है

यहाँ से हम नज़र रखे हुए हैं;
और परख रहे हैं
हर आम आदमी की गति को,
और फिर
अवसर-बेअवसर
इन्हें गतिशून्य भी कर देते हैं,
ताकि
अबाध गति मिल सके उनको
जो ‘जेड प्लस’ की सुविधा से लैस हैं;
ताकि
दौड़ सकें ‘लाल बत्ती युक्त गाड़ियाँ’
बिना किसी अवरोध के
फर्राटे से.
तुम्हें तो शायद
हमारे काम के बोझ का
अन्दाजा भी नहीं होगा
’उगाही’ से लेकर
आँकड़ों के संवर्धन को रोकने के लिये
रात के अन्धेरे में
रेल की पटरियों पर
लावारिश लाशें रखने तक का काम
हमें करना पड़ता है.
क्या तुमने महसूस नहीं की
वारदात स्थल को छोड़कर
हर स्थान पर हमारी मौजूदगी ?
या शायद तुमने देखी ही नहीं है
घटनास्थल पर पहुँचकर
विवादास्पद और अनसुलझे
जाँच परिणाम तक पहुँचने की
हमारी तत्परता
इस प्रक्रिया में हम अब तो
फारेंसिक जाँच, नार्को टेस्ट जैसे
भारी भरकम शब्द भी शामिल कर लिये हैं.

अब तो यकीन हो गया होगा कि
हमारी सुरक्षा व्यवस्था
दुरूस्त और चाक-चौबन्द है.

शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

नए साल पर कुछ नया करना है ~~

क्या खोया क्या पाया

बड़ी तल्लीनता से

हर रिश्ता निभाया

पुराना वर्ष गया और

नया वर्ष आया.

 

नव वर्ष पर

कुछ नया करने को ठानी

सुबह उठते ही बड़े प्यार से

पत्नी को बोला 'रानी'

छूटती ही बोली -

दिमाग तो ठीक है

क्या है तुम्हें परेशानी!

आठ बज गये है

चाय दिया न पानी

बड़े आये कहने वाले 'रानी'

लगता है खोये हुए हो

किसी और के खयालों में

इस तरह तो नहीं बोले

इतने सालो में!

 

मैनें किसी तरह पिण्ड छुड़ाया

घर से निकलकर सड़क पर आया

रास्ते में एक भिखारी नज़र आया

कुछ नया करने का मैने राह पाया

मैं बोला Happy New Year

कहाँ जा रहे हो Dear

क्या तुम्हें पता नहीं

जीवन एक सौगात है

भीख माँगना बुरी बात है.

वह बोला -

भीख माँगना भी छोड़ देंगे

अपने जीवन की धारा भी

आप कहते हैं तो मोड़ देंगे

पर इतना बता दीजिए

अपने बीबी-बच्चों को

आपके घर कब छोड़ दूँ

आपको बड़े भिखारी

नज़र नहीं आते हैं.

आप जैसे समाज सेवक

हमीं से क्यूँ टकराते हैं?

 

मैं कन्नी काटकर आगे बढ़ा

घबराकर फ़ुटपाथ पर चढ़ा

मैने सोचा

छोटे-मोटे बाधाओं से

क्या डरना है

नए साल पर कुछ तो

नया करना है.

 

मैं समझ गया था

किसी और को बदलने से अच्छा है

खुद में ही परिवर्तन लाये

फिर मन में विचार जगा

क्यों न पुराने रिश्तों को

नए ढंग से निभाया जाए;

रोतों को चलो हँसाया जाए;

किसी भटके को राह दिखाया जाए;

कुछ खोकर भी कुछ पाया जाए;

चलो इस तरह

नया साल मनाया जाए.

 

Happy New Year 1010