सोमवार, 22 अप्रैल 2019
गालियों की वापसी ....
शुक्रवार, 1 जनवरी 2010
नए साल पर कुछ नया करना है ~~
क्या खोया क्या पाया
बड़ी तल्लीनता से
हर रिश्ता निभाया
पुराना वर्ष गया और
नया वर्ष आया.
नव वर्ष पर
कुछ नया करने को ठानी
सुबह उठते ही बड़े प्यार से
पत्नी को बोला 'रानी'
छूटती ही बोली -
दिमाग तो ठीक है
क्या है तुम्हें परेशानी!
आठ बज गये है
चाय दिया न पानी
बड़े आये कहने वाले 'रानी'
लगता है खोये हुए हो
किसी और के खयालों में
इस तरह तो नहीं बोले
इतने सालो में!
मैनें किसी तरह पिण्ड छुड़ाया
घर से निकलकर सड़क पर आया
रास्ते में एक भिखारी नज़र आया
कुछ नया करने का मैने राह पाया
मैं बोला Happy New Year
कहाँ जा रहे हो Dear
क्या तुम्हें पता नहीं
जीवन एक सौगात है
भीख माँगना बुरी बात है.
वह बोला -
भीख माँगना भी छोड़ देंगे
अपने जीवन की धारा भी
आप कहते हैं तो मोड़ देंगे
पर इतना बता दीजिए
अपने बीबी-बच्चों को
आपके घर कब छोड़ दूँ
आपको बड़े भिखारी
नज़र नहीं आते हैं.
आप जैसे समाज सेवक
हमीं से क्यूँ टकराते हैं?
मैं कन्नी काटकर आगे बढ़ा
घबराकर फ़ुटपाथ पर चढ़ा
मैने सोचा
छोटे-मोटे बाधाओं से
क्या डरना है
नए साल पर कुछ तो
नया करना है.
मैं समझ गया था
किसी और को बदलने से अच्छा है
खुद में ही परिवर्तन लाये
फिर मन में विचार जगा
क्यों न पुराने रिश्तों को
नए ढंग से निभाया जाए;
रोतों को चलो हँसाया जाए;
किसी भटके को राह दिखाया जाए;
कुछ खोकर भी कुछ पाया जाए;
चलो इस तरह
नया साल मनाया जाए.
Happy New Year 1010
