Thursday, May 30, 2019

मूर्खता : एक सात्विक गुण

मूर्खता एक सात्विक गुण है, जिसे धारण करने से अपमान की सम्भावना कम हो जाती है. याद रखें अपमानित सदा विद्वत्ता का दुर्गुण धारण करने वाले ही होते हैं. यह अनुवांशिक भी हो सकती है और अर्जित भी. मेरा यह आलेख अनुवांशिक रूप से मूर्खता धारण करने वालों के लिये नहीं है वरन उनके लिये है जो अर्जित मूर्खता के अभिलाषी हैं.
विकीपीडिया भी असमर्थ है इसे परिभाषित करने में :
This article does not cite any references or sources.
इसकी परिभाषा मिले न मिले इससे हर कोई परिचित जरूर होगा. इसे धारण करने से आप कई समस्याओं से निजात पा सकते है या लाभान्वित हो सकते है :
1. आपने अक्सर सुना ही होगा अरे ! वह तो मूर्ख है उसकी बात का क्या बुरा मानना.जिसके  कारण कोई आपकी बात का बुरा न माने   तो वह गुण अर्जित करने में क्या बुराई हो सकती है?
2. विद्वानों के मुख से विद्वत्ता की बातें आम बात है, पर मूर्खता गुण धारण करने वाला अगर भूल से   विद्वत्ता की बात कर दे तो बल्ले-बल्ले.
3. कठिन कार्यों से निजात मिल जाती हैक्योंकि मूर्खों से कोई कार्य नहीं करवाना चाहता है.
4. दो मूर्ख (सात्विक) जब मिलते है तो मूर्खता की एक नई किस्म तैयार होती है.
5. दिमागी तनाव अधिकांश बीमारियों का कारक है, मूर्खता गुण धारण करने वाले दिमागी तनाव की   स्थिति में नहीं आते इसलिये तमाम बीमारियों से बचे रहते हैं.

   इसके अलावा और भी अनेक गुण हैं जो स्वत: ही इस गुण को धारण करने के पश्चात उजागर हो  जायेगी. यदि मैं इसके गुण गिनाता रहा तो इसे अर्जित करने का उपाय रह जायेगा. इस अर्जित    करना  उतना कठिन नहीं है जितना इसे लम्बे समय तक धारण करना. एक नितांत निरीह प्राणी  जिसे  सभ्य संसार गधा कहता है; हमारा प्रेरणा स्रोत हो सकता है. फिर भी कुछ उपाय निम्नवत   हैं
  1. प्रथमत:, अपने स्वरूप को थोड़ा सुधार करके हम इस गुण को प्रदर्शित कर सकते हैं. एक सर्वेक्षण कहता है : 75 प्रतिशत पुरूष, महिलाओं के सौन्दर्य को प्रधानता देते हैं जबकि 75 प्रतिशत महिलायें पुरूष सौन्दर्य का आकलन उसके बाह्य स्वरूप से नहीं बल्कि, आंतरिक विवेक, बुद्धि और मानसिक स्थिति से करती हैं. अत: स्वरूप निर्धारण भी महत्वपूर्ण पहलू है.
  2. जब कभी विद्वत्ता की बातें हों तो शरीक अवश्य हों पर ऐसा प्रदर्शित करें कि कुछ समझ में आया ही नहीं और सही व्यक्तव्य जानते हुए भी अनर्गल व्यक्तव्य जारी करें.
  3. पानी से आधा भरा गिलास आपको आधा भरा नज़र नहीं आना चाहिये वरन वह आधा खाली नज़र आना चाहिये.



  1. याद रखें गंजापन नहीं नज़र आना चाहिये, क्योकि गंजापन बुद्धिमानी का लक्षण माना जाता है. इसके लिये या तो विशेष प्रकार का टोपी पहनना चाहिये या बाल ट्रांसप्लांट करवा लेना चाहिये.
  2. दिन में कई बार नीचे के चित्र जैसा मुँह गोल कर लेना चाहिये और ’आल ईज़ भेल’ गुनगुनाना चाहिये. यह आपके प्रति लोगों की धारणा बदलने में सहायक होगा


कहने को और भी बहुत कुछ था पर क्या करूँ इस चक्कर में कहीं मैं मूर्खता से वंचित करार न दे दिया जाऊँ.
वैधानिक चेतावनी : अतिशय मूर्खता प्रदर्शन आपको नैसर्गिक मूर्ख बना सकता है 

5 comments:

roopchandrashastri said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (31-05-2019) को "डायरी का दर्पण" (चर्चा अंक- 3352) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kamini Sinha said...

बेहद मज़ेदार सर ,,बिलकुल सच मूर्खता के भी बड़े फायदे हैं ,सादर नमस्कार

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन हिन्दी के पहले समाचार-पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' की स्मृति में ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

Jaishree Verma said...

अतिशय मूर्खता प्रदर्शन आपको नैसर्गिक मूर्ख बना सकता है....बेहतरीन !😂

दिगंबर नासवा said...

हा हा मस्त ... निर्मल हास्य से लेकर व्यंग का मज़ा ...