ख़बरों में वो ही नहीं
जिनकी ये ख़बर है
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डर से ये
कहीं मर न जाएं
बस यही डर है
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लूटेरे भी
लूटेंगे किसको?
लुटा हुआ ये शहर है
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दवा भला
असर करे कैसे?
शीशियों में तो ज़हर है
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मंजिल तो
इस रास्ते पर है ही नहीं
अँधा ये सफर है
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खौफजदा,
गुमनाम सा, दुबका हुआ
ये शेरे-बबर है
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नाम तो है
पर बताये कैसे?
खौफ का इतना असर है
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मुआवजा तो खूब मिला
पर उनको नहीं
जिनके उजड़े घर हैं









