Saturday, April 13, 2019

इ शहर में आउर कौनो परेशानी नाही बा (भोजपुरी ग़ज़ल)

खाना नाही, बिजली आउर पानी नाही बा
इ शहर में आउर कौनो परेशानी नाही बा

मनई क देखा कान कुतर देहलेस चुहवा
लागेला कि इ शहर में चूहेदानी नाही बा

देखे के पहलवान जैसन लोग दिख जालन  
सच सुना कि इहा मगर जवानी नाही बा

इज्जत आबरू क लूटन रोज क बात हौ
बतावा के कही कि इ राजधानी नाही बा

हिस्से में इनके किस्सा-कहानी नाही हौ
काहें कि संगे इनके बुढ़िया नानी नाही बा 

12 comments:

नीरज गोस्वामी said...

वाह..अद्भुत ग़ज़ल...

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना रविवार 14 अप्रैल 2019 के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

roopchandrashastri said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (14-04-2019) को "दया करो हे दुर्गा माता" (चर्चा अंक-3305) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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दुर्गाअष्टमी और श्री राम नवमी की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

देवेन्द्र पाण्डेय said...

वाह!

विनोद पाराशर said...

बहुत सुंदर गज़ल बा!👌

Meena sharma said...

वाह !

Onkar said...

बहुत खूब

मन की वीणा said...

वाह खूब अलग अंदाज बेहतरीन।

Meena Bhardwaj said...

लाजवाब सृजन । अलग सा अन्दाज ।

sudha devrani said...

बहुत सुन्दर....

दिगंबर नासवा said...

गज़ब ... मज़ा आ गया इस शैली पर ...
हर शेर लाजवाब है ...

संजय भास्‍कर said...

....अद्भुत ग़ज़ल

कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
संजय भास्‍कर
शब्दों की मुस्कुराहट
http://sanjaybhaskar.blogspot.com