हालात पर
नज़र रखने का
वायदा था
समुंदर की सतह
पर
इस देश को
रखकर
हम नज़र रक्खे
हैं कि नहीं?
कीमतें कम
करने पर
सवाल आखिर
क्यूँ?
डालर की तुलना
में
रूपये का कीमत
हम कम रक्खे
हैं कि नहीं?
किये वायदे से
हम
मुकर तो नहीं
रहे हैं
उन्हीं वायदों
को फिर से
घोषणापत्रों
में
हम रक्खे हैं
कि नहीं?
स्वयम्भू हैं
हम
हमसे तुम डरना
और ज्यादा
सवाल मत करना
वरना क्या पता
हम
रात आठ बजे
टीवी पर आकर
कह दें ठहाका लगाकर
“ये जो तुम्हारे बगल में
तुम्हारी
पत्नी बैठी है
आज रात बारह
बजे के बाद ........”
तुम्हीं बताओ
तुम्हारी सोच
में
हम बम रक्खे
हैं कि नहीं?
तुम्हें बेशक
रूला दिया
पर
अपनी आँखों को
भी
हम नम रक्खें
हैं कि नहीं?
समुंदर की सतह
पर
इस देश को
रखकर
हम नज़र रक्खे हैं कि
नहीं?