जज़्बात

संस्कारित-सभ्यों के बीच आदमखोर कबीले क्यूं हैं ?

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शुक्रवार, 26 जून 2026

अनकहा संवाद

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  अक्सर मैं अपने घर के बाहर पत्र-पेटी में एक कोरा काग़ज़ डाल देता हूँ। फिर चाभी से उसे खोलता हूँ , जैसे डाकिया अभी-अभी तुम्हारा ख़त ...
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M VERMA
वाराणसी में पला-बढ़ा, दिल्ली में अध्यापन कार्य में संलग्न था। जब कभी मैं दिल के गहराई में कुछ महसूस करता हूँ तो उसे कविता के रूप में पिरो देता हूँ। अभिनय भी मेरा शौक है।
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