जज़्बात

संस्कारित-सभ्यों के बीच आदमखोर कबीले क्यूं हैं ?

सोमवार, 9 मार्च 2026

सूरज को अल्टिमेटम

›
  सूरज , तुम्हारी निष्पक्षता पर अब संदेह होने लगा है। लगता है रोशनी का वितरण भी अब किसी फाइल में अटका हुआ है। झोपड़ियों तक पहुँच...
5 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 4 मार्च 2026

गर्भ पर पहरा

›
  तैनात हैं... चारों ओर! धर्म के , जाति के ,  और तथाकथित ' संस्कारों ' के — वे स्वयंभू सैनिक , जो डर से पैदा हुए हैं। वे घ...
14 टिप्‍पणियां:
रविवार, 1 मार्च 2026

अलगौझे की लड़ाई

›
तब , हमारे गाँव में अलगौझे की लड़ाइयाँ अक्सर पनप जाया करती थीं। दोनों भाई खेत की मेड़ों से लेकर आँगन की देहरी तक डोरी तानकर अपना-अपना...
6 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

प्रेम का पाइथागोरस

›
समकोण त्रिभुज का लंब बनूँ मैं , तुम बन जाना आधार।   प्रेमाकुल अधरों पर अधरों का स्पर्श , क्षण भर में बन जाए अंगार।   जब मिलन-बि...
6 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

“दो मुर्दों की बातचीत / प्यास”

›
गंगा किनारे मणिकर्णिका घाट पर दो मुर्दे लाए गए , अन्य व्यवस्था होने तक चिलचिलाती धूप में अगल-बगल लिटाए गए।   अचानक एक मुर्दे ने दू...
18 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

निडर राजा और जिद्दी प्रश्न

›
एक निडर राजा था, उसे किसी से डर नहीं लगता था। डरता था तो बस— प्रेस कॉन्फ़्रेंस से। मंत्रिपरिषद ने समझाया— “महाराज, प्रेस कॉन्फ़्रेंस से ...
10 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

पर्दों के पीछे का देश

›
  लगता है हमारा धर्म-प्रचार तंत्र जंग खा गया है , तभी तो लोगों को “ जय श्रीराम ” और “ अल्लाहु अकबर ” के बीच अचानक याद आ जाती है — अपन...
13 टिप्‍पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
M VERMA
वाराणसी में पला-बढ़ा, दिल्ली में अध्यापन कार्य में संलग्न था। जब कभी मैं दिल के गहराई में कुछ महसूस करता हूँ तो उसे कविता के रूप में पिरो देता हूँ। अभिनय भी मेरा शौक है।
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.