जज़्बात

संस्कारित-सभ्यों के बीच आदमखोर कबीले क्यूं हैं ?

शनिवार, 25 जुलाई 2026

मौन की प्रतिध्वनि

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  कुछ शब्द बिना बोले निःशब्द कर देते हैं। कुछ शब्द बहुत बोलते हैं , पर उन्हें सुनता कोई नहीं। वाक्यों के अर्थ ज़रूरी नहीं कि शब्द...
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सोमवार, 20 जुलाई 2026

पहले होर्डिंग का जन्म

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  पहले होर्डिंग का जन्म यक़ीनन पहले झूठ के साथ हुआ होगा। और सतरंगी पहला झूठ शायद भाषा के आविष्कार के साथ जन्मा होगा। भाषा-विहीन समय...
12 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 16 जुलाई 2026

प्रेम का फिक्स डिपॉजिट

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  मेरे दिल में जितना भी प्रेम था , सब मैंने फिक्स डिपॉजिट में तुम्हारे पास रख दिया। अब मैं उसके ब्याज से ही अपना काम चला रहा हूँ , कभ...
12 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 14 जुलाई 2026

कठघरे में चिड़िया

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  एक नाबालिग चिड़िया उड़ान का संतुलन सीख रही थी। उसकी आँखों में बस आसमान की ऊँचाइयाँ थीं। तभी उड़ान पर अपना एकाधिकार समझने वाले बीस-बाइस गिद...
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शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

आँकड़ों की दीवार

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हँसते हुए चेहरे ओढ़े अक्सर ये रोते हैं , पता है फसल का हश्र , फिर भी बोते हैं। चीखती हुई भूख में क्या-क्या खोते हैं. , पेट और पीठ अब गले ल...
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बुधवार, 8 जुलाई 2026

चुम्बन और चुम्बक

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चुम्बन और चुम्बक में केवल ध्वन्यात्मक साम्य ही नहीं , स्वभाव का रिश्ता भी है। दोनों खींच लेते हैं अपने-अपने ध्रुव की ओर। चुम्बकीय फ्ल...
2 टिप्‍पणियां:
रविवार, 5 जुलाई 2026

अंकुरित शब्द

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मैंने एक शब्दकोश के समस्त शब्दों को निर्देशित किया — एक कविता के लिए। और उन्हें एक विस्तृत जाल की तरह फैला दिया शब्दों से शब्द ...
13 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 2 जुलाई 2026

आँकड़ों की रोटी

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  रोटियों से खेलने वाले रोटियों के लिए तरसते भूखे लोगों को रोटियाँ बाँटते हैं। फ़र्क़ बस इतना है कि ये रोटियाँ आटे से नहीं , आँकड़ों...
11 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 29 जून 2026

.... बाकी सब ठीक है

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  इंसान औ ' इंसानियत की कमी है , बाकी सब ठीक है , हैवानियत की गिरफ़्त में ज़मीं है , बाकी सब ठीक है। अट्टहास और विद्रूप हँसी से गूँज रह...
14 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 26 जून 2026

अनकहा संवाद

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  अक्सर मैं अपने घर के बाहर पत्र-पेटी में एक कोरा काग़ज़ डाल देता हूँ। फिर चाभी से उसे खोलता हूँ , जैसे डाकिया अभी-अभी तुम्हारा ख़त ...
8 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 25 जून 2026

जब 'क्यों' अपराध बन गया

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  माई लार्ड ,   यह शख़्स जितना निरीह दिखाई देता है , अंदर से उतना ही "शातिर" है — कम-से-कम अभियोजन की फ़ाइल यही कहती है। और...
10 टिप्‍पणियां:
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M VERMA
वाराणसी में पला-बढ़ा, दिल्ली में अध्यापन कार्य में संलग्न था। जब कभी मैं दिल के गहराई में कुछ महसूस करता हूँ तो उसे कविता के रूप में पिरो देता हूँ। अभिनय भी मेरा शौक है।
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