शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

गिद्धों का लोकतंत्र

 

उन्होंने पाल रखे हैं
गिद्धों को—

मासूम और अवयस्क
परिंदों की टोह लेने के लिए।

ये अक्सर
रेकी पर निकलते हैं—

लौटकर
चटखारे लेते हुए
उन्हें अवगत कराते हैं
परिंदों की बेबसी का।

अबकी बार

शिकार का फरमान

जारी नहीं होता—

 

वे खुद

गिद्धों के साथ

निकल पड़ते हैं।

वे नोच डालते हैं
मासूम परिंदों के पंख—

 

कुछ परिंदों का

गोश्त चबाते हुए

वे चटखारे लेते हैं—

फिर

बचे हुए परिंदों को

उड़ने की नसीहत देते हैं।

3 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

👌

M VERMA ने कहा…

Thanks ❤️ 😊

Sweta sinha ने कहा…

आपके विचार में -
सत्ताधारी पाखंडी,धूर्त गिद्ध हैं और प्रदर्शनकारी बिचारे मासूम,निरीह सफेद कबूतर हैं।

सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १३ अक्टूबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।