सोमवार, 4 मई 2026

स्वयं की वापसी

वह गहन अवसाद में था
और
सिर पकड़कर
सशरीर बैठ गया

उसने अजनबियों से
मदद मांगी
लोग ठिठककर आगे बढ़ गए

उसने अपने अज़ीज़ों को पुकारा
वे आए—
आश्वासन दिए,
हाथ बढ़ाए,
मगर फिर अधर में ही
छोड़कर चल दिए

अंततः
हर उम्मीद से परे जाकर
उसने खुद का हाथ पकड़ा
और
आहिस्ता-आहिस्ता
सशरीर खड़ा हो गया

10 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा आपने रूह को छू लेने वाली बात कही है आपने

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Digvijay Agrawal ने कहा…

 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 07 मई, 2026
को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
  

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

Anita ने कहा…

प्रेरक रचना

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

Aman Peace ने कहा…

Wahh!!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊