सोमवार, 4 मई 2026

स्वयं की वापसी

वह गहन अवसाद में था
और
सिर पकड़कर
सशरीर बैठ गया

उसने अजनबियों से
मदद मांगी
लोग ठिठककर आगे बढ़ गए

उसने अपने अज़ीज़ों को पुकारा
वे आए—
आश्वासन दिए,
हाथ बढ़ाए,
मगर फिर अधर में ही
छोड़कर चल दिए

अंततः
हर उम्मीद से परे जाकर
उसने खुद का हाथ पकड़ा
और
आहिस्ता-आहिस्ता
सशरीर खड़ा हो गया

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