मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

भूख: विकास की अनचाही गलती

क्या कहारोज़गार चाहिए?
तुम भूखे हो?
शर्म नहीं आती!
इस तरह तो तुम
देश को बदनाम करने की
साज़िश रच रहे हो।

क्या तुम्हें नहीं पता
हमारा देश
विश्व अर्थव्यवस्था के
तीसरे पायदान पर है?

हमारी उपलब्धियाँ देखो
धर्म-रक्षा के नाम पर
करोड़ों रुपये
पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।

क्या तुम्हारी भूख
धर्म से बड़ी है?

उपलब्धियों का आँकड़ा
इतना विशाल है
कि केरल, कश्मीर और
बंगाल की फ़ाइलों से निकलकर
कुछ नाम
विदेशी फ़ोल्डरों तक पहुँच गए

जहाँ अपराध
सत्ता से भी
ज़्यादा नंगा है।

सुनो
तुम्हारे पेट की यह मरोड़
भूख नहीं,
विकास की राह का
एक बहुत बड़ा रोड़ा है।

क्या तुम्हें नहीं दिखतीं
आसमान छूती मूर्तियाँ?
क्या उनकी चमक में
तुम्हारी झुर्रियाँ
मिट नहीं जानी चाहिए थीं?

और हाँ
जब विदेशी अख़बारों में
हमारा नाम आता है,
तो सीना गर्व से
चौड़ा हो जाता है।

मुद्दा चाहे
फ़ाइल्सका हो
या घोटालोंका
नाम तो हुआ न!

तो चुप रहो।
अपनी अंतड़ियों को समझाओ
कि राष्ट्रहित में
कभी-कभी
भूखा रहना ही
सबसे शुद्ध
देशभक्ति है।

2 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

बहुत सुंदर
समसामयिक

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊