गुरुवार, 15 जनवरी 2026

Zero Watt वाला प्रेम


मुझे 'Zero Watt' वाला प्रेम पसंद है

जो धीमा ही सही, पर

अविराम चले,

बिना शोर के,

बिना दिखावे के,

बस एक धुंधली सी रोशनी देता हुआ।

 

यह प्रेम ऊर्जा जलाता नहीं,

ऊर्जा सहेजता है

यही इसकी सबसे बड़ी ताक़त है।

 

वह 1000 Watt का बल्ब

पूरे शहर को रौशन करने की ज़िद में

खुद को जला बैठता है,

और अपनी ही तपिश से

फ्यूज हो जाता है।

 

जबकि Zero Watt का बल्ब

न बहुत चमकता है,

न तालियाँ बटोरता है,

पर जल्दी टूटता भी नहीं।

 

शायद... लंबा चलना हो तो

थोड़ा कम जलना ज़रूरी है।

7 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

वाह वाह ज़ीरो बल्ब के बहुत फ़ायदे हैं

M VERMA ने कहा…

😃

Madhulika Patel ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Madhulika Patel ने कहा…

बहुत सुंदर रचना .

M VERMA ने कहा…

धन्यवाद

Sweta sinha ने कहा…

वाह ; अद्भुत विचार,कोमल, मन को हौले से छूते भाव। बिंब तो अनूठा है बिल्कुल सर।
अंतिम सारयुक्त दोनों पंक्तियाॅं जीवन के किताब की अनेक अध्यायों का निचोड़ है।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १६ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया