मंगलवार, 27 जनवरी 2026

"स्पर्शबिंदु" - "The Tangent"


मैं जानता हूँ
तुम मुझे समग्र रूप से
स्पर्शित नहीं कर सकती
क्योंकि
तुम एक सरल रेखा हो
और मैंवृत्त


तुम्हारा स्पर्श
किसी एक बिंदु पर
आकर ठहर जाता है,
जबकि मेरा अस्तित्व
घूमता रहता है
अपने ही केंद्र के चारों ओर।

तुम आगे बढ़ती हो
दिशा के भरोसे,
मैं लौट आता हूँ
हर बार
खुद तक।


हम मिलते हैं
संभवतः
किसी स्पर्शबिंदु पर,
पर वहीं
हमारी असहमति भी जन्म लेती है
तुम आगे बढ़ जाना चाहती हो,
और मैं
उस क्षण को
पूरा करना चाहता हूँ।


इसलिए
तुम मुझे छू तो सकती हो,
समेट नहीं सकती
जैसे रेखा
वृत्त को
समझ तो ले,
पर बन नहीं सकती।

चलो, एक सहमति बनाएँ कि
हम न रेखा रहें, न वृत्त
हम एक नया आयाम बनें,
जहाँ ठहरना भी गति हो,
और भटकना भी
एक मंज़िल।

5 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

गणितीय प्रेम-वाह

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

M VERMA ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Aman Peace ने कहा…

Wah!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊