पहले होर्डिंग का जन्म
यक़ीनन
पहले झूठ के साथ हुआ होगा।
और सतरंगी पहला झूठ
शायद
भाषा के आविष्कार के साथ
जन्मा होगा।
भाषा-विहीन समय में
झूठ
अगर था भी,
तो गूँगा था—
अपने ही भीतर
कैद।
फिर
जैसे-जैसे
हम
सभ्य (तथाकथित) होते गए,
झूठ ने
शब्द ओढ़ लिए,
फिर रंग,
फिर नारे,
फिर मुस्कराते चेहरे।
और एक दिन
वही आवरण
होर्डिंग बन गया।
क्योंकि
होर्डिंग
और कुछ नहीं—
झूठ का
सबसे विशाल चेहरा है।

2 टिप्पणियां:
मगर झूठ पर यक़ीन करने वाले अधिक हैं सच से भागने वाले उससे भी अधिक
यकीनन, यही तो बिडम्बना है
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