मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

अधूरी पूर्णता

किसी ने पूछा था क्या है कविता?”
मैंने कहा

कविता अविरल प्रवाह है,
स्वयं से मिलने की अथक चाह है।
यह कोई प्रयोग नहीं,
यह तो अथाह है
जिसे मापा नहीं जा सकता,
सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

कविता शब्दों में कैद नहीं होती
वह शब्दों से टकराती है,
उन्हें तोड़ती है,
और खामोशी को भी आवाज़ दे जाती है।

जहाँ भाषा हार मान लेती है,
वहीं से कविता अपनी ज़िद शुरू करती है।

कविता कोई निष्कर्ष नहीं
वह तो एक दरवाज़ा है,
जो हर बार खुलता है
किसी नए अर्थ की ओर।

कविता सिर्फ शुरुआत है
और वही कविता सबसे पूरी है
जो अधूरी रह जाती है,
क्योंकि
कविता कभी पूरी नहीं होती।

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