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मौसम का मिज़ाज बदलना है
सर्दियो मे हमको पिघलना है
सफर सहेज लिया है दामन में
सूरज से भी पहले निकलना है
माना 'तंज' बोये हैं पत्थरों ने
ठोकरों के बाद भी संभलना है
बाजुओ की पतवार सलामत रहे
लहरों के खिलाफ़ फिसलना है
क्यूँ करू मैं इंतज़ार बादलो का
धूप के साये में ही टहलना है
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