गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

पानी में डूबती मछलियाँ

 

अँधेरों का ख़ौफ़ इतना कि
खिड़कियाँ
खुलने से मना कर देती हैं।

दरवाज़े
हर थाप पर
काँप जाते हैं।

छिपकलियाँ
दीवार से उतरकर
जिस्म पर रेंगने लगती हैं।

नींद भयभीत
दूर खड़ी
काँप रही है।

साँसें
अपनी ही आहट से
चौंक उठती हैं।

नारों की शक्लें
अनायास बदलकर
फुसफुसाहट बन गई हैं।

ये सब तब से है
जब से
अदालत ने साबित कर दिया—

मछलियों की मौत
पानी में डूबने से हुई है।

10 टिप्‍पणियां:

  1. जब तक मानव अपने भीतर की शक्ति से, आत्मशक्ति से नहीं जुड़ता, भय से मुक्ति संभव ही नहीं, कोई न कोई भय पीछे लगा ही रहेगा

    जवाब देंहटाएं
  2. कहते रहिए वो कह देंगे मछलियों ने आत्महत्या की है :)

    जवाब देंहटाएं