गुरुवार, 25 जून 2026

जब 'क्यों' अपराध बन गया

 

माई लार्ड,

 

यह शख़्स जितना निरीह दिखाई देता है,
अंदर से उतना ही "शातिर" है
कम-से-कम अभियोजन की फ़ाइल यही कहती है।
और फ़ाइलों को सच होने की आवश्यकता नहीं होती,
केवल दर्ज होने की होती है।

यह सरकार से
आयातित प्रश्न पूछता है
ऐसे प्रश्न,
जिनका यहाँ अब कोई उत्पादन नहीं होता।
क्योंकि नई नीति में
उत्तर निर्मित किए जाते हैं,
प्रश्न नहीं।

रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि
सरकार गठन के साथ ही
"सवाल पूछना"
एक संदिग्ध गतिविधि घोषित हो चुका है।
अब अपराध
विचार के बाद नहीं,
विचार से पहले जन्म लेता है।

माई लार्ड,

पुलिस ने इसके घर से
कई डिग्रियाँ बरामद कीं
जो इस बात का प्रमाण थीं
कि अभियुक्त अब भी
उस विलुप्त सभ्यता में रह रहा था,
जहाँ शिक्षा का
भविष्य हुआ करता था।

नई व्यवस्था में
डिग्री केवल एक विनम्र काग़ज़ है,
जो बेरोज़गारी को
सम्मानजनक मौन में बदल देता है।

इसके घर से
कुछ "सच्ची खबरें" भी मिलीं।
वे इसलिए ख़तरनाक थीं
क्योंकि वे सच थीं।
और सच,
माई लार्ड,
अब प्रशासनिक सुविधा के अनुकूल नहीं माना जाता।

अभियोजन का कहना है कि
ऐसी खबरें
जनता में आक्रोश फैला सकती हैं।
जबकि आक्रोश
अब केवल
अनुमति-प्राप्त अवसरों पर ही वैध है।

एक और गंभीर प्रश्न है

जब शिक्षा स्वयं
'सीमित अनुमति' में बदल चुकी हो,
तो इतनी डिग्रियाँ
आख़िर आई कहाँ से?
किस अदृश्य बाज़ार से?
और किस स्वीकृत वास्तविकता में
उन्हें प्रमाणित किया गया?

माई लार्ड,

मेरे पास एक गवाह भी है।
उसका कहना है कि
अभियुक्त की शिक्षा
"क्यों?" नामक
एक असंगठित प्रश्न से शुरू हुई थी।

और वही
इसका पहला अपराध था।

उसी दिन से
यह व्यवस्था की नज़र में
एक स्थायी त्रुटि बन गया
जिसे सुधारा नहीं जा सकता,
केवल दर्ज किया जा सकता है।

अतः,
अपने समापन निवेदन में
मैं यही प्रार्थना करता हूँ कि
इसके भोले चेहरे के पीछे
सत्ता-नीतियों के विरुद्ध
एक सुनियोजित असहमति छिपी हुई है।

इसे विधि के अनुसार
अधिकतम दंड दिया जाए

ताकि आने वाली पीढ़ियाँ
यह भूल जाएँ
कि कभी
प्रश्न पूछना भी
मनुष्य होने का प्रमाण माना जाता था।

6 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन कटाक्ष अपने लेख के माध्यम से आपने व्यक्त किया है

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Sweta sinha ने कहा…

बेहद गंभीर रचना सर।
आने वाली पीढ़ियॉं हमारे द्वारा बोये गये कर्मों का फल भुगतेंगी।
सादर।
--------
जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २६ जून २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

M VERMA ने कहा…

रचना के मर्म को अनुभव किया आपने, यह सुखद है
बहुत-बहुत शुक्रिया

हरीश कुमार ने कहा…

सुन्दर

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह