नेतवन के कारण चहु ओर त तबाही बा
लुट
गयल देश मगर शौक राजशाही बा।
ओनके
बदे सजेला छप्पन भोग क थरिया
हमनी खातिर कडुवा तेलवो* क मनाही बा।
महलन
में बा सतरंगी अँजोरिया क नदिया
झोपडी
में ढेबरी जलावे के भी कोताही बा।
भूख
से बेहाल जनता पूछत बाटे चुपके से,
ई
कइसन रामराज, कइसन बादशाही बा।
ओनकर
हर गलती पर परदा पड़ल रहेला,
गरीब
गुरबा के संसवो पर भी उगाही बा।
धरम
के नाम पे बाँट देहला अंग्रेजन जइसे,
फूट
के सरहद पर अबो तैनात सिपाही बा।
देखा
कतल जेकर भयल ओही बा कातिल
एही बात के बदे त अदालत में गवाही बा।
*थरिया = थाली
*कडुवा तेल = सरसो का तेल
.png)
12 टिप्पणियां:
वाह वाह 👌
Thanks 😊
आज का कटु सत्य यही है,, वर्ग भेद, जात पात, छोटा बड़ा ,,सबके लिए अलग अलग व्यवस्था, अलग अलग कानून है,,कहने भर को सबके लिए सब बराबर है, कागजो में,,,,
बहुत सटीक
बहुत-बहुत धन्यवाद
Wah!
Thanks 😊
भोजपुरी की मिठास और व्यंग्य का छौंक बेहतरीन ! नमस्ते ।
बेहतरीन रचना
धन्यवाद
Thanks 😊
Thanks 😊
एक टिप्पणी भेजें