गुरुवार, 28 मई 2026

आम आदमी नंगा है

 

बाकी सब भला चंगा है,
बस आम आदमी नंगा है।

 

महलों में उत्सव जारी है,
सड़कों पर फैला दंगा है।

 

इतना पाप धुला जल में

कि मैली हो गई गंगा है।

 

बेरंग भूख की बस्ती में

आश्वासन रंग-बिरंगा है।

 

समझ रहे जिनको दाता

सच में वो भिखमंगा है।

 

जिसको उडता देख रहे

वह महज एक पतंगा है।

 

धरती में है बीज बहुत

यह तो एक सारंगा* है।

 

* सारंगा = एक प्रकार की छोटी नाव जो एक ही लकड़ी की बनती है

10 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

यथार्थवादी सृजन

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया 😃

Aman Peace ने कहा…

Wah!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Sweta sinha ने कहा…

मेरे द्वारा लिखा गया पांच लिंक का आमंत्रण नहीं दीख रहा है सर,कृपया सृपैम में चेक करियेगा।
सादर।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

शुभा ने कहा…

वाह! शानदार !

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया 😃