बाकी
सब भला चंगा है,
बस आम आदमी नंगा है।
महलों
में उत्सव जारी है,
सड़कों पर फैला दंगा है।
इतना
पाप धुला जल में
कि
मैली हो गई गंगा है।
बेरंग
भूख की बस्ती में
आश्वासन
रंग-बिरंगा है।
समझ
रहे जिनको दाता
सच
में वो भिखमंगा है।
जिसको
उडता देख रहे
वह
महज एक पतंगा है।
धरती
में है बीज बहुत
यह
तो एक सारंगा* है।
* सारंगा = एक प्रकार की छोटी
नाव जो एक ही लकड़ी की बनती है

10 टिप्पणियां:
यथार्थवादी सृजन
शुक्रिया 😃
Wah!
Thanks 😊
मेरे द्वारा लिखा गया पांच लिंक का आमंत्रण नहीं दीख रहा है सर,कृपया सृपैम में चेक करियेगा।
सादर।
वाह
शुक्रिया
शुक्रिया
वाह! शानदार !
शुक्रिया 😃
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