लोग बताते हैं कि
मरने से ठीक पहले तक
वह ज़िंदा था—
क्योंकि
उसकी साँसें चल रही थीं,
वह चल रहा था।
पर सच तो यह है कि
वह मरने से बहुत पहले ही
मर गया था।
बातूनी था—
पर बोलता नहीं था,
सोचने लायक बातों पर भी
वह सोचता नहीं था।
अक्सर
वह बिना चेहरे के
भीड़ में खड़ा मिलता था।
उसके मरने के लक्षण
पहली बार तब दिखे,
जब उसके माथे की सलवटें
ज़िंदा रहने की ललक में
धीरे-धीरे
अदृश्य हो गईं।
आज जब वह
फाइनली मर गया है,
तो लोग दुखी हैं—
क्योंकि
अब उन्हें पहली बार
उसकी मौत दिखाई दी है।

शुक्रिया
जवाब देंहटाएंWah!
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंबहुत सुंदर रचना है मरना और जीना दोनों का अच्छा चित्रण किया गया है
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंशुक्रिया
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंशुक्रिया 😃
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