रविवार, 5 अप्रैल 2026

इंसानियत—नियम व शर्तें लागू

चीख की
कोई भाषा नहीं होती,
उसे सुनने के लिए
किसी अनुवादक की ज़रूरत नहीं
उसका एकमात्र वाहक
संवेदना है,
और संवेदना की भी
कोई भाषा नहीं होती।

 

हृदयविदारक होता है
चीख और संवेदना का मिलन,
क्योंकि इस मिलन से
जन्म लेती हैं
पराश्रव्य सुबकियाँ।

 

जघन्यता और पाशविकता
चीखों की जनक हैं
इनका जन्म
अक्सर
आदिम हवस
और धार्मिक कट्टरता की
अंधी सुरंगों में होता है।

 

यूँ तो इनकी
कोई जाति, धर्म नहीं होता,
पर ये अक्सर
तहकीकात करती हैं
जाति और धर्म की,
और सुविधानुसार
इंसानियत को
लहूलुहान कर देती हैं।

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छा लिखा है कहाँ से शब्दों को जोड़ कर कहाँ पहुँचा दिया आपने

    जवाब देंहटाएं
  2. जाति और धर्म की दुहाई देने वाले दरअसल अपनी जहालत को शब्दों के पीछे छिपा रहे होते हैं, मानव अपनी मूर्खताओं को कुछ नाम देकर ढकना चाहता है

    जवाब देंहटाएं
  3. हृदयविदारक होता है
    चीख और संवेदना का मिलन,
    क्योंकि इस मिलन से
    जन्म लेती हैं
    पराश्रव्य सुबकियाँ।
    क्या बात...
    बहुत सटीक एवं लाजवाब ।

    जवाब देंहटाएं
  4. धर्म के नाम पर
    कराह रही है इंसानियत
    ईश्वर, अल्लाह मौन है
    शोर मचाये हैवानियत।
    सादर।
    ------
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार ७ अप्रैल २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं