मंगलवार, 24 मार्च 2026

एक्सपायरी डेट का उजाला

 

अंधेरे के हिमायती
उजाले के लिए सुरक्षित खेतों में
चुपचाप अंधेरा बो गए।

जब फसल लहलहाई,
तो पहरे पर खड़े कर दिए गए
असंख्य प्रवक्ता
अंधेरे के फ़ायदे गिनाने के लिए।

उसकी फैलती विकरालता देख
उजाले भी सहम गए,
सामने आने से कतराने लगे।

मौका देखकर
उजाले को अफवाहकरार दिया गया,
और हर दीये की लौ पर
ठोंक दी गई मुहर
एक्सपायरी डेट”  की।

जो सूरज की बात करते थे,
जो रोशनी का ज़िक्र करते थे
उन्हें देशद्रोही, आतंकवादी
ठहराने की मुहिम चल पड़ी।

प्रचार का तंत्र भी
कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो गया
झूठ को उजाला
और अंधेरे को सच
साबित करने में।

जब सबने मान लिया
कि अंधेरा ही सत्य है,
तभी खामोशी से
मन में डर और नफ़रत बोई गई।

फिर बच्चों के हाथों में
हथियार थमा दिए गए,
और अंधेरे ने
हर अपराधी को
अपनी छाया में पनाह दे दी।

सत्ता के घमंड में डूबे अंधेरे
यह देख ही न सके
कि उजाले के कुछ बीज
अब भी ज़िंदा हैं,
यहीं कहीं
धरती की गहराइयों में
अपने समय की प्रतीक्षा में ...

12 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

वाह!! सुंदर सृजन

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

Admin ने कहा…

भाईसाब आपकी ये कविता पढ़कर लगा जैसे कोई धीरे-धीरे परतें हटाकर सच्चाई सामने रख रहा हो। आपने अंधेरे को सिर्फ हालात नहीं, एक सोच और व्यवस्था बना कर दिखाया, और वही बात सबसे ज्यादा चुभती है। मुझे सबसे अच्छा ये लगा कि तुमने सिर्फ शिकायत नहीं की, बल्कि पूरा खेल दिखाया—कैसे डर फैलता है, कैसे लोग चुप होते हैं और कैसे झूठ को सच बना दिया जाता है।

Aman Peace ने कहा…

Wah!!

Razia Kazmi ने कहा…

वाह बहुत ही सुन्दर रचना है

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

लाजवाब

M VERMA ने कहा…

समीक्षात्मक टिप्पणी के लिए शुक्रिया

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊 🫂

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

Digvijay Agrawal ने कहा…

 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में मंगलवार 05 मई, 2026
को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
  

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया