Monday, November 7, 2011

खिड़कियाँ खोल झाँक रहा है मकान ….

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इससे पहले कि

’शब्द’ शब्दों से मिलकर

बुन दें एक अभेद्य तिलिस्म,

तुम लिखो एक खत

शब्दों के बिना ।

.

तत्पर हैं

संवादों के आखेटक;

बनाने को इनको

विस्फोटक,

खिड़कियाँ खोल झाँक रहा है

हर मकान;

तैनात किए गए है

सुनने को आतुर

अनगिनत कान,

इससे पहले कि

हमारे-तुम्हारे बीच के संवाद

अनुवादित हों

तुम कहो एक ‘शब्द’

शब्दों के बिना ।

.

कुंठित क्यों करना

नैसर्गिक आवेगों को,

प्रवाहित होने दो

पराश्रव्य और पराशब्द

संवेगों को,

इससे पहले कि

शब्द मेरे हों

हताश; निराश

तुम सुनो एक ‘शब्द’

शब्दों के बिना ।

38 comments:

देवेन्द्र पाण्डेय said...

जज़्बात पर जज़्ज्बात की बाते हुई हैं
शब्दों के बिन, प्यार की बाते हुई हैं।
..बहुत सुंदर।

प्रवीण पाण्डेय said...

इन अद्भुत गहरे भावों को बाटने का आभार

Vivek Rastogi said...

एक शब्द शब्दों के बिना
बेहतरीन

Pallavi said...

तुम सुनो एक शब्द शब्द के बिना .... वाह शानदार प्रस्तुति समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

सुमन'मीत' said...

waah bahut sundar..shabdon ne jadu kar diya....

रचना दीक्षित said...
This comment has been removed by the author.
रचना दीक्षित said...

एक शब्द को सुनना शब्दों के बिना.

बहुत ही बेहतरीन प्रयोग. सुंदर प्रस्तुति के लिये बधाई.

डॉ. जेन्नी शबनम said...

''tum suno ek shabd shabdon ke bina, tum kaho ek shabd shabdon ke bina''...bahut sundar sahabd bhaav. shubhkaamnaayen.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

कुंठित क्यों करना

नैसर्गिक आवेगों को,

प्रवाहित होने दो

पराश्रव्य और पराशब्द

संवेगों को,

शब्दों के बिना संवाद ..बहुत खूबसूरत रचना ..

Sunil Kumar said...

सुनो एक शब्द शब्दों की बिना .... इस पर टिप्पणी के लिए शब्द नहीं हैं

रश्मि प्रभा... said...

शब्दों के बगैर एक ख़त ...
इसे पढ़ लिया तो फिर कोई मुश्किल नहीं

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

इससे पहले कि

शब्द मेरे हों

हताश; निराश

तुम सुनो एक ‘शब्द’

शब्दों के बिना ।
Waah!

Shah Nawaz said...

वाह! बहुत गहराई लिए हुए है यह रचना... अच्छी लगी...

डॉ0 मानवी मौर्य said...

कभी-कभी मौन शब्‍दों से अधिक मुखर होता है। अच्‍छी प्रस्‍तुति।

Reena Maurya said...

baut hi sundar kavita hai

Human said...

बहुत सुन्दर भाव शब्द में पिरोये हैं आपने ! बेहतरीन कविता !

कृपया पधारें ।
http://poetry-kavita.blogspot.com/2011/11/blog-post_06.html

दिगम्बर नासवा said...

शब्द शब्दों के बिना ... बहुत ही लाजवाब कल्पना है वर्मा जी ... अद्बुध गहरे भाव ...

वाणी गीत said...

शब्दों के बिना शब्द ...
भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

अरुण चन्द्र रॉय said...

bahut khoobsurat kavita ! alag tarah ka vimb hai...

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर और सशक्त रचना!

रजनीश तिवारी said...

तुम लिखो एक खत शब्दों के बिना ।
तुम सुनो एक ‘शब्द’ शब्दों के बिना ।
बहुत खूब , सुंदर रचना ... शुभकामनाएँ

रजनीश तिवारी said...

तुम लिखो एक खत शब्दों के बिना ।
तुम सुनो एक ‘शब्द’ शब्दों के बिना ।
बहुत खूब , सुंदर रचना ... शुभकामनाएँ

डॉ टी एस दराल said...

हमेशा की तरह गहरे भाव लिए रचना ।
अति सुन्दर ।

सतीश सक्सेना said...

बेहतरीन रचना के लिए बधाई भाई जी !
अलग अंदाज़ है ...

आशा जोगळेकर said...

शब्दों के बिना शब्द वाह । परावाणी से ही विचारों का आदान प्रदान । सुंदर रचना ।

सदा said...

वाह ...बहुत खूब ।

अनुपमा पाठक said...

गहन भाव!

Ratan Singh Shekhawat said...

बढ़िया भावपूर्ण प्रस्तुति
Gyan Darpan

दिलबाग विर्क said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-694:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

'साहिल' said...

वाह! जादू भरे शब्द पिरोयें हैं आपने!

mridula pradhan said...

shabdon ke bina.......wah......

anjana said...

बहुत सुन्दर भाव...सुंदर प्रस्तुति ...

कविता रावत said...

बहुत सुन्दर रचना!

POOJA... said...

kaash koi shabd hota
mere paas bhi
to zaroor likh deti yaha
shabdon k bina...

laajawaab...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

अद्भुत....
सादर...

चन्दन..... said...

तुम लिखो एक खत

शब्दों के बिना ।

.बहुत हि सुनदार रचना !

शुभकामनाएं!

***Punam*** said...

nishabd....bas hun!

मदन मोहन सक्सेना said...

बहुत सुंदर ! जितनी सार्थक रचना उतनी ही कलात्मक ! शुभकामनायें !
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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