सोमवार, 29 जून 2026

.... बाकी सब ठीक है

 

इंसान औ' इंसानियत की कमी है, बाकी सब ठीक है,
हैवानियत की गिरफ़्त में ज़मीं है, बाकी सब ठीक है।

अट्टहास और विद्रूप हँसी से गूँज रहा है पूरा शहर,
मुस्कानों के पीछे चेहरा मातमी है, बाकी सब ठीक है।

सच बोलना, इंसाफ माँगना अब जुर्म ठहरा है यहाँ,
ज़िंदगी बिखर जाना लाज़िमी है, बाकी सब ठीक है।

ख़ौफ़ के साये में पल रही हर नई पीढ़ी की ख़ामोशी,
हर ज़ेहन में एक अनकही कमी है, बाकी सब ठीक है।

भूख की आँखों में सपनों का आख़िरी दीपक बुझ गया,
आँकड़ों में तिलस्मी ख़ुशहाली थमी है, बाकी सब ठीक है।

लब सिल गए हैं डर के मारे शहर के हर गवाह के,
क़ातिल के हक़ में हर गवाही थमी है, बाकी सब ठीक है।

बच्चों के बस्ते में किताबों की जगह नफ़रतें रख दीं,
रूह-ए-तालीमआज सहमी-सहमी है, बाकी सब ठीक है।

'वर्मा' सच लिखने की आदत छोड़ भी दे तो कैसे छोड़े,
स्याही में आज भी ज़िंदा आदमी है, बाकी सब ठीक है।

15 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बाकी सब ठीक है ...
करार व्यंग ... हर शेर लाजवाब ...

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया 😃

Sweta sinha ने कहा…

बेहद गहन अर्थ लिए समसामयिकी पर
धारदार तंज करती रचना सर।
----
क़लम कवि की उम्मीद ना खो दे कहीं
डर बस इतना-सा, बाकी सब ठीक है।
सादर।
-----
नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३० जून २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

Sweta sinha ने कहा…

बेहद गहन अर्थ लिए समसामयिकी पर
धारदार तंज करती रचना सर।
----
क़लम कवि की उम्मीद ना खो दे कहीं
डर बस इतना-सा, बाकी सब ठीक है।
सादर।
-----
नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३० जून २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

M VERMA ने कहा…

हृदय से धन्यवाद।
उम्मीद ही तो वह स्याही है जिससे कलम अपना प्रतिरोध लिखती है। कोशिश रहेगी कि सच की धार भी बनी रहे और उम्मीद की रोशनी भी।

Admin ने कहा…

आपका हर शेर दिल को छूता है और सोचने पर मजबूर करता है कि हम विकास की बातें तो करते हैं, लेकिन इंसानियत कहीं पीछे छूटती जा रही है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!

Razia Kazmi ने कहा…

बाक़ी सब ठीक है आपकी क़लम ने तो और आपकी सोच ने बहुत कुछ लिख दिया बाक़ी बहुत ही अच्छा लिखा है आपने

M VERMA ने कहा…

आभार

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

हरीश कुमार ने कहा…

सब ठीक होकर भी कुछ ठीक नहीं है, और हमे लगता है सब ठीक है 👏👏 बहुत सुंदर रचना

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Aman Peace ने कहा…

Wah!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊