शनिवार, 13 जून 2026

कतल जेकर भयल ओही बा कातिल (भोजपुरी)

 

नेतवन के कारण चहु ओर त तबाही बा

लुट गयल देश मगर शौक राजशाही बा।

 

ओनके बदे सजेला छप्पन भोग क थरिया*

हमनी खातिर कडुवा तेलवो* क मनाही बा।

 

महलन में बा सतरंगी अँजोरिया क नदिया

झोपडी में ढेबरी जलावे के भी कोताही बा।

 

भूख से बेहाल जनता पूछत बाटे चुपके से,
ई कइसन रामराजकइसन बादशाही बा।

 

ओनकर हर गलती पर परदा पड़ल रहेला,
गरीब गुरबा के संसवो पर भी उगाही बा।

 

धरम के नाम पे बाँट देहला अंग्रेजन जइसे,
फूट के सरहद पर अबो तैनात सिपाही बा।

 

देखा कतल जेकर भयल ओही बा कातिल

एही बात के बदे त अदालत में गवाही बा।



*थरिया = थाली

*कडुवा तेल = सरसो का तेल

12 टिप्‍पणियां:

  1. आज का कटु सत्य यही है,, वर्ग भेद, जात पात, छोटा बड़ा ,,सबके लिए अलग अलग व्यवस्था, अलग अलग कानून है,,कहने भर को सबके लिए सब बराबर है, कागजो में,,,,
    बहुत सटीक

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  2. भोजपुरी की मिठास और व्यंग्य का छौंक बेहतरीन ! नमस्ते ।

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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