गुरुवार, 4 जून 2026

सपनों का मलबा

कुछ पेपर लीक पर
इतना शोर क्यों है?
निष्पक्ष परीक्षाओं पर
इतना ज़ोर क्यों है?

आख़िर
आत्महत्याएँ हुई ही कितनी हैं?
कुछ गिनी-चुनी।

जो कि उम्मीद से कम है
लोकतंत्र के गणित में
ये संख्याएँ हैं बेकार

आख़िर क्या-क्या देखेगी

बेचारी सरकार।

 

और फिर बेईमानी भी तो

एक प्रक्रिया है

ईमानदारी और धैर्य परीक्षण की

आपको क्या लगता है,
हम सो रहे हैं?
हम भी आप जितना ही
चिंतित हो रहे हैं।

पिछली बार जब पेपर लीक हुआ था,
हम जाँच आयोग लाए थे;
उसकी जाँच अभी चल रही है,
हाँ यह सच है कि

नतीजे नहीं आए थे।

धैर्य रखिए,
व्यवस्था काम कर रही है;
हर घोटाले पर
एक नई फ़ाइल तैयार हो रही है।

छात्र सपनों के मलबे में दबें
तो दबे रहें,
महत्त्वपूर्ण यह है कि
जाँच की प्रक्रिया
निरंतर जारी है।

10 टिप्‍पणियां:

Sweta sinha ने कहा…

समसामयिक घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया लिखना आपकी क़लम बख़ूबी जानती है सर।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ५ जून २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

M VERMA ने कहा…

हार्दिक आभार

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सटीक

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

Anita ने कहा…

गहरा कटाक्ष, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, पर ऐसा होता हुआ दिख नहीं रहा है

हरीश कुमार ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया 😃

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया 😃

DAMANDELHI.BLOGSPOT.COM ने कहा…

हार्दिक आभार जी

M VERMA ने कहा…

आभार